मारपीट के 31 साल पुराने मामले में निहाल, जमाल अहमद, सिराज अहमद, फरीद अहमद, इस्लाम और मो. असलम को एससीएसटी एक्ट कोर्ट ने दोषी माना है। विशेष न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ने दोषियों को चार-चार साल की सजा सुनाई है।
हालांकि, हत्या की कोशिश और अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियम से जुड़े आरोपों में बरी कर दिया। सरकारी वकील ने बताया कि मामले की रिपोर्ट वादी रामचंद्र ने 21 जून 1992 को मलिहाबाद थाने में दर्ज कराई थी। बताया था कि वह सुबह नर्सरी के सामने छप्पर बना रहा था।
इसमें उसके भाई, भतीजे, मां और दोनों बहने मदद कर रही थीं। इस दौरान आरोपियों ने लाठी व बांके से हमला कर दिया था। इसमें सभी परिजन घायल हो गए थे।
बच्ची से दुराचार के दोषी को उम्रकैद
मेला देखने गई बच्ची को सेब का लालच देकर दुराचार करने वाले राकेश यादव को पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश विजेंद्र त्रिपाठी ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 1.20 लाख का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जुर्माना राशि में से एक लाख रुपये पीड़िता के नाम से बैंक में एफडी कर उसे दिया जाए। अधिवक्ता सुखेन्द्र प्रताप सिंह और अभिषेक उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता की मां ने विभूतिखंड थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 15 अक्तूबर 2021 को वह पति व तीन बच्चों के साथ मेला देखने गई थी, जहां छोटी बेटी अचानक लापता हो गई। करीब दो घंटे के बाद उसकी बेटी गोमतीनगर स्टेशन की ओर से रोती हुई आती दिखी। पूछने पर उसने आपबीती बताई थी।