पूर्व आईएएस अधिकारी हरीश चंद्र व उनके बेटे के कब्जे से गोमती नदी की जमीन जिला प्रशासन मंगलवार को खाली कराएगा। इसके लिए टीम मौके पर जाएगी। पैमाइश के बाद यहां जमीन पर कब्जा वापस लेने की कार्रवाई होगी।
तहसीलदार सदर नवीन चंद्र के निर्देश पर तहसीलदार सदर के आदेश के मुताबिक मंगलवार को नायब तहसीलदार काकोरी की अध्यक्षता में बनी सात सदस्यीय टीम जमीन पर कब्जा लेगी। राजस्व टीम के सहयोग के लिए माल के प्रभारी निरीक्षक से जरूरी पुलिस फोर्स की मांग भी एसडीएम सदर ने की है। तहसीलदार बख्शी का तालाब राजस्व दस्तावेज के साथ मौके पर रहकर इसमें जरूरी सहयोग करेंगे।
नदी की जमीन पर बन गया फार्म हाउस
इससे पहले डिप्टी कलेक्टर न्यायिक ने आदेश कर करीब 5.82 हेक्टेयर जमीन वापस नदी के खाते में दर्ज कराने का आदेश किया था। सात जुलाई के आदेश के मुताबिक गोपरामऊ गांव की नदी किनारे हरीश चंद्र की जमीन खसरा संख्या 2488स की 2.8040 हेक्टेयर और उनके बेटे अभिमन्यु की खसरा संख्या 2488 की 1.0120 हेक्टेयर जमीन से दोनों का नाम निरस्त कर खाता संख्या 01092 में गोमती के खाते में दर्ज की जानी है।
अब भी 150 बीघा जमीन पर कब्जा
नदी की जमीन वापस दिलाने की लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट महेंद्र पांडेय का कहना है कि केवल पूर्व आईएएस हरीश चंद्र व उनके परिजन ही नहीं इसके अलावा भी कई दूसरे लोग नदी की जमीन पर कब्जा किए हैं। आउटर रिंगरोड निकलने के बाद रैथा रोड पर गोपरामऊ में मौजूद यह जमीन आज के समय में बेशकीमती हो चुकी है। आज भी यहां नदी के पूर्व में रहे बहाव के चलते जंगल बना हुआ है। अगर वन विभाग, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन केवल नदी के खसरा की जमीनों की संयुक्त पैमाइश करा खाली करा लें। यहां करीब 150 बीघा जमीन कब्जामुक्त होगी।