लखनऊ। भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला ने कहा कि सीखने का कोई शॉर्टकट नहीं है। शोधकर्ता बनने का कोई फास्ट ट्रैक तरीका नहीं है। व्यक्ति को समय निवेश और आत्म-अनुशासन का अभ्यास करने की जरूरत है। वे समारोह में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान कार्यशाला के समापन समारोह में बोल रहीं थीं।
डुइंग इम्पैक्टफुल रिसर्च विषय पर बोलते हुए बेंटले विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संदीप पुराओ ने कहा कि अनुसंधान की समस्याओं को अनुशासन जनित के बजाय अभ्यास जनित बनाना चाहिए। विद्वानों को व्यावहारिक स्थितियों से प्रेरणा लेने और व्यापक समुदाय की जरूरत के हिसाब से अनुसंधान करना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रदीप कुमार ने कहा, महामारी के बाद, हमने व्यवसाय और नीति में बदलाव देखे हैं। डिजिटल युग में शुरू किए गए परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए इसे समझने का लक्ष्य सामने है। इस पर काम करना होगा। कार्यशाला में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे सहित, यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब और वियतनाम के साथ पूरे भारत से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया।