लखनऊ। चेतना साहित्य परिषद की ओर से चारबाग स्थित बाल संग्रहालय में आयोजित प्रतिनिधि काव्य संध्या में रविवार को कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। शुरुआत अरविंद झा के मातृ स्तवन से हुई। इसके बाद राजकिशोर नमन ने अपने छंद खोया है उदास मन, गुझिया फुलाए गाल... से सामाजिक परिवेश को उजागर किया। डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी ने सुनाया- डाल दिया जो रंग चूनर में कैसे छूटेगा, सांस हमारी ताना देगी साजन कूटेगा...। हरीलाल मिलन, डॉ. शिव भजन कमलेश, डॉ. हिमांशु सक्सेना, हेमलता सिंह, सत्यम चोपड़ा, शिखा भट्टाचार्य ने भी अपनी रचनाएं पेश की। संचालन प्रमोद द्विवेदी ने किया।