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दो सालों से नहीं तलाश पाया सीएमओ

Sat, 30 Aug 2014 01:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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खाद्य एवं रसद विभाग दो साल की खोज के बाद भी पूर्णकालिक मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) की तलाश नहीं कर पाया है।
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नतीजतन प्रभारियों के जरिये इस पद का काम चलाया जा रहा है। हालत यह है कि 5 अगस्त को डीपीसी की बैठक भी हो चुकी है। पर नतीजा घोषित नहीं किया गया है।

पूर्णकालिक सीएमओ तैनात न होने के कारण ही धान व गेहूं की खरीद से लेकर राशन की दुकानों से बांटे जाने वाले अनाज के आवंटन का काम प्रभावित हो रहा है।

मुख्य विपणन अधिकारी का काम धान व गेहूं खरीद की नीति बनाना और उसके अनुसार किसानों से अनाज खरीदने का इंतजाम करना है।

लेकिन वर्ष 2010-11 में बसंतलाल सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर किसी अधिकारी की स्थायी तैनाती नहीं हो पाई है।

पहले प्रोन्नति में आरक्षण का मामला न्यायालय में लंबित होना बाधा बना। बाद में अधिकारियों की हीलाहवाली से यह मामला टलता रहा।

नतीजतन कनिष्ठ अधिकारियों को प्रभारी बनाकर इस पद का काम लिया जा रहा है।

अप्रैल 2012 में फैसला आ जाने और प्रोन्नति में आरक्षण समाप्त होने के बाद भी अधिकारियों ने प्रोन्नति समिति की बैठक बुलाने की जरूरत नहीं समझी।

कई बार बुलाई गई बैठक : जानकारी के मुताबिक, इस पद पर तैनाती के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक बुलाने का फैसला कई बार हुआ।

पर, किसी न किसी वजह से यह बैठक टाली जाती रही। विभाग के अधिकारियों की लगातार मांग के बाद पांच अगस्त को यह बैठक हो पाई।

उम्मीद थी कि 15 अगस्त तक इसका नतीजा घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन 25 दिन बीतने के बावजूद इस बैठक का फैसला अभी तक घोषित नहीं किया गया।
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