लखनऊ। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से गर्भ में पल रहे बच्चे में दिल संबंधी बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इससे इलाज करना संभव हो जाता है। केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग की ओर से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से शिशुओं की समस्याओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है। डॉ. सौरभ कुमार ने बताया कि मस्तिष्क और रीढ़ में होने वाली समस्याओं के बारे में भी इससे बेहतर परिणाम मिलते हैं। डॉ. आशु सेठ भल्ला और डॉ. नीरज जैन ने बाल चिकित्सा कार्डियोपल्मोनरी के मामले में होने वाली जांच पर चर्चा की। डॉ. कन्नन गणशेखरन ने डीटीआई, एमआर परफ्यूजन और एमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी तकनीकों पर बात की। उन्होंने बताया कि बाल न्यूरो-रेडियोलॉजी का उपयोग करके बच्चों में होने वाली समस्याओं का काफी पहले पता लगाया जा सकता है। कार्यशाला के आयोजन सचिव और केजीएमयू के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रमुख, प्रो. डॉ. अनित परिहार ने बताया कि शनिवार से होने वाले आयोजन में देशभर के विशेषज्ञ शामिल होंगे। काफ्रेंस में बच्चों में होने वाली समस्याओं की पहचान की नई तकनीक पर चर्चा होगी।