मथुरा घराने के पखावज वादकों में से एक दिनेश प्रसाद का सनतकदा महोत्सव में स्टेज पर ही हृदय गति रूकने से निधन हो गया। सोमवार की दोपहर में बारादरी के मंच पर ताल वाद्य कचहरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। दोपहर 2.30 बजे के करीब कार्यक्रम शुरु हो चुका था।
उनके साथ सारंगी पर संगत कर रहे जीशान अब्बास ने बताया कि 15-20 मिनट तक पखावज बजाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें लारी ले जाया गया था। लारी कार्डियोलॉजी के डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि यहां आने तक उनकी मौत हो चुकी थी। दिवंगत पखावज वादक के बेटे पीयूष ने बताया कि तीन से चार बजे के बीच हमें उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल ले जाए जाने की सूचना मिली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार की सुबह 10 बजे आलमबाग स्थित श्मशान घाट पर होगा। परिवार में बेटे पीयूष के अलावा पत्नी कमलेश व तीन बेटियां निधि, रूचि व श्रुति हैं।
दिवंगत दिनेश प्रसाद 1989 से 2014 तक संगीत नाटक अकादमी में संगीत की शिक्षा दी थी। 2005 में उन्हें एसएनए अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। वे पखावज वादक के साथ-साथ बेहतरीन तबलावादक भी थे।