लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहिमामऊ में नहर से लगी हुई सिंचाई विभाग की जमीन पर अंसल प्राॅपर्टीज द्वारा कथित अवैध कब्जे के मामले में दायर विशेष अपील पर अगली सुनवाई 21 अगस्त को नियत की है। इस मामले में सिंचाई विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अनिल गर्ग बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में पेश हुए और कोर्ट को वांछित जानकारी दी।
यह आदेश जस्टिस एआर मसूदी व जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने अंसल प्रापर्टीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से दाखिल विशेष अपील पर पारित किया है। इसमें एकल पीठ की ओर से पारित आदेश को चुनौती दी गई है।
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता-प्रथम प्रशांत सिंह अटल ने कोर्ट को बताया कि सरकार को सीबीआई जांच पर आपत्ति नहीं है। सरकार ने पूरी 3.2 हेक्टेयर जमीन वापस ले ली है। साथ ही अंसल से 34.74 लाख रुपये क्षतिपूर्ति भी वसूली है।
मालूम हो कि बीती मई में सेवा संबंधी एक मामले की सुनवाई के दौरान एकल पीठ ने पाया था कि अहिमामऊ माइनर से लगी सिंचाई विभाग की जमीन अंसल के कब्जे में है।
बाद में जमीन का एक हिस्सा एक निजी स्कूल को स्थानांतरित हो गया। एकल पीठ ने पाया कि सात नवंबर 2007 को एलडीए के तत्कालीन सचिव ने पत्र लिखकर उक्त जमीन को प्राइवेट बिल्डर को हस्तांतरित किए जाने की आवश्यकता जताई थी।
यही नहीं, 19 मार्च 2008 को प्रमुख सचिव, आवास एवं नगरीय विभाग ने भी सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर उक्त जमीन को प्राइवेट बिल्डर को देने को कहा था।
तब एकल पीठ ने टिप्पणी भी की थी कि सिंचाई विभाग की इस जमीन को सरकार में बैठे उच्च अधिकारियों, एलडीए और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से पहले अवैध कब्जा करवाया गया और फिर उस पर एक नामचीन स्कूल की भव्य इमारत खड़ी कर दी गई।
इसी के साथ एकल पीठ ने सीबीआई को प्राथमिक जांच करने का भी आदेश दिया था। इसके अनुपालन में सीबीआई ने प्राथमिक जांच की रिपोर्ट अंसल की वर्तमान अपील की सुनवाई के दौरान सील कवर में कोर्ट के समक्ष पेश की थी।