चेतावनी पर भी कचरा प्रबंधन के काम में सुधार न आने पर अब निजी कंपनी ईकोग्रीन एनर्जी के काम पर कैंची चलने वाली है। अंदरखाने बन रही योजना के मुताबिक, इसे प्लांट संचालन या कूड़ा कलेक्शन में से एक काम से हटाकर नई कंपनी को जिम्मेदारी दी जाएगी। उधर, मंडलायुक्त ने भी कंपनी को तीन दिन में काम में सुधार लाने का अल्टीमेटम मंगलवार को दिया था। हालांकि, इसके बावजूद इसका प्लांट बुधवार को भी चालू नहीं हो सका।
ज्योति इनवायरोटेक कंपनी के शिवरी प्लांट चलाने में फेल होने के बाद चीनी कंपनी ईकोग्रीन एनर्जी वर्ष 2017 से इसका काम देख रही है। इसके साथ ही वह घरों से कूड़ा कलेक्शन करती है। हालांकि, वह कोई भी काम सही से नहीं कर पा रही है। इसे लेकर एनजीटी उस पर जुर्माना लगा चुकी है। ईकोग्रीन की लापरवाही के चलते ही प्लांट पर करीब साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ लगा है। वहीं, करीब दो महीने से प्लांट ठप है। एक महीने पहले मंडलायुक्त रोशन जैकब ने निरीक्षण के वक्त प्लांट संचालन सही करने और क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए थे, पर ऐसा हुआ नहीं। उन्होंने शहर में कंपनी के ट्रांसफर स्टेशन और पोर्टेबल काम्पैक्टर में सुधार के निर्देश दिए, जिस पर भी काम नहीं हुआ। ऐसे में मंडलायुक्त ने मंगलवार को कंपनी के अफसरों को तलब कर तीन दिन में काम मेें सुधार लाने का अल्टीमेटम दिया। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी से आधा काम लेेकर दूसरी कंपनी को दिया जाएगा।
कंपनी का दावा, छह से शुरू हो जाएगा प्लांट
ईकोग्रीन के प्रतिनिधि नागार्जुन रेड्डी ने बताया कि प्लांट पर इलेक्ट्रिफिकेशन का काम चल रहा है। यह पांच अगस्त तक पूरा हो जाएगा और छह की सुबह से प्लांट चलना शुरू हो जाएगा। 15 दिन बाद प्लांट पूरी क्षमता से काम करेगा और रोजाना करीब 2000 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण होगा। वहीं, डंप पड़े साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए भी छह मशीनें लगाई जाएंगी। यह काम एक साल में पूरा कर लिया जाएगा।
सुधार नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई
ईकोग्रीन का काम सही नहीं है। कंपनी 5.20 लाख घरों से कूड़ा कलेक्शन का दावा कर रही है, पर आधे घरों तक भी नहीं पहुंच रही है। इसके तीन ट्रांसफर स्टेशन में से एक ही सही चल रहा है। प्लांट पर भी काम नहीं हो रहा है। इसे लेकर मंडलायुक्त ने चेतावनी दी है। इसके बाद कार्रवाई होगी।
- संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता, नगर निगम