माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को होटल ग्रैंड जेबीआर गोमती नगर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित “ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट इन उत्तर प्रदेश थ्रू ग्रीन बिल्डिंग्स” विषयक सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी अब विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरणीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज वायु प्रदूषण, गिरता भूजल स्तर गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जिनमें से लगभग 24 लाख भारत में हैं। ग्रीन एनर्जी केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा, हर नागरिक को यह गर्व होना चाहिए कि उसका घर, उसकी सोसायटी, उसका बाज़ार और उसका शहर ग्रीन है। उन्होंने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग्स से 30-40 प्रतिशत ऊर्जा तथा 20-30 प्रतिशत जल की बचत संभव है। हमारा शहर प्रकृति का गर्व बनें, ऐसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज ही हरित भविष्य की नींव डालें। प्लास्टिक मुक्ति से वेस्ट-टू-एनर्जी तक पर काम करने की जरूरत है। कहा कि जब देश की लगभग 70 प्रतिशत इमारतें अभी बननी शेष हैं, तब यह सही समय है कि ग्रीन कंस्ट्रक्शन को मुख्यधारा बनाया जाए। उन्होंने सरकार से अधिक कर छूट, कम ब्याज दर पर ऋणऔर संपत्ति कर में रियायत जैसे प्रोत्साहनों को और मजबूत करने का आग्रह किया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने ग्रीन बिल्डिंग कोड को अपनाकर देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और 22,000 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भारत के नेट ज़ीरो 2070 संकल्प के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त उन्होंने शिविरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 2100 मीट्रिक टन कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।