प्रदेश में कई तरह के विश्वविद्यालय हैं और उनकी अपनी विशेषता है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि इसका लाभ दिव्यांगों को मिले। क्योंकि इनके अंदर बहुत ऊर्जा व सामर्थ्य है। यह विचार रखे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने।
वे डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि में ब्रेल प्रेस के उद्घाटन और दिव्यांगजन के शैक्षणिक पुनर्वास एवं कौशल विकास कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहीं थीं।
उन्होंने कहा कि विवि आपस में इसके लिए एमओयू करें। किसी विश्वविद्यालय के पास ड्रोन उड़ाने की विशेषता है, वो दिव्यांग विद्यार्थियों को भी इसका प्रशिक्षण दें।
विवि एक-दूसरे की विशेषता, कौशल और लैब का उपयोग करें। तभी समाज का बहुमुखी विकास होगा।
राज्यपाल ने कहा कि पुनर्वास विवि में लगी ब्रेल प्रेस का लाभ प्रदेशभर के जरूरतमंदों को मिलना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी एक-दो दिव्यांग बच्चे पढ़ते हैं। उनको भी ब्रेल में किताबें मिलें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भी यही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस तरह के स्कूलों में पढ़ रहे 12वीं के बच्चों का एक सर्वे कर उनकी रुचि क्या है और वे क्या सीखना चाहते हैं, की जानकारी लेनी चाहिए।
इससे विश्वविद्यालय को फीडबैक भी मिलेगा और विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। इससे राज्य सरकार को सीटें बढ़ाने व नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने कुलपति को छात्रों से संवाद करने, छात्रावासों में सुविधाएं बढ़ाने का सुझाव भी दिया। कार्यक्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि विवि में अगले साल पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाएंगे। दिव्यांग विद्यार्थियों को हर सुविधा व सहयोग देंगे।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेमंत राव, कुलपति प्रो. राणा कृष्णपाल सिंह, रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह उपस्थित थे।
नैक में ए ग्रेड के लिए करें प्रयास
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को नैक में ए ग्रेड लाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एनईपी में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। इसीलिए हर पांच साल में नैक मूल्यांकन पर जोर दिया गया है। आज के विद्यार्थी भी काफी अपडेट हैं। नैक की तैयारियों में उनका भी सहयोग लिया जाए। टीमें बनाकर और नियमित बैठक कर तैयारी पूरी की जाए।