उत्तर प्रदेश में तीन-तीन विभागों के एक प्रमुख सचिव साहब अपने मंत्री जी से काफी परेशान होकर केंद्र की राह तक रहे हैं।
पता चला है कि पिछले काफी दिनों से उनकी अपने विभाग के मंत्रीजी से जरा भी पटरी नहीं खा रही थी।
मंत्रीजी जब राज्यमंत्री थे, तो प्रमुख सचिव साहब मुख्यमंत्री से बात करके नियमानुसार काम करने का आदेश करवा देते थे।
जब से मंत्रीजी को स्वतंत्र प्रभार मिला, वो मनमौजी हो गए और अपने हिसाब से काम करवाने लगे।
चर्चा ये भी है कि हाल ही में मंत्रीजी ने शासनादेश के खिलाफ जाकर कुछ ट्रांसफर करवा दिए। नियम के मुताबिक, शासन से पूछा तक नहीं।
प्रमुख सचिव महोदय ने पता किया तो पता चला कि सारे ट्रांसफर मंत्रीजी के निर्देश पर ही किए गए हैं। इस पर प्रमुख सचिव महोदय ने नियमों वाली एक फाइल मंत्रीजी के पास भेज दी।
मकसद था कि मंत्रीजी नियमों से रू-ब-रू हो जाएं और आगे से ऐसी हरकतें न करें। फाइल मंत्रीजी के पास पहुंची तो वो नाराज हो गए।
उन्होंने प्रमुख सचिव महोदय को बुलाया और कहा, 'शासन कौन चलाता है? सरकार या अफसर? सरकार मैं हूं या प्रमुख सचिव?'
मंत्रीजी के मूड का अंदाजा लगाकार प्रमुख सचिव महोदय ने केंद्र में तैनाती की गुजारिश कर डाली है।
अब ये महज गॉसिप है या सच...कुछ दिन में यह भी सामने आ ही जाएगा।