दुनिया से जीते लेकिन ठाकुर साहब अपनों से मात खा रहे हैं। बड़ी मुश्किल से टिकटिंग व्यवस्था से पिंड छूटा तो दो नई फांस आन पड़ी हैं।
अपने ही एक बयान बहादुर के पर कतरने पर मचे बवाल के बाद थोड़े चैन से थे कि बनारस के पंडितजी ने लहरबाजी का बयान देकर बिगुल बजा दिया।
उनका निपटारा हो नहीं पाया था कि घरवालों ने यूपी के नेताजी की सरकार लुढ़कने का मुहूर्त निकाल दिया।
एक ने नहीं दो ने नहीं बारी-बारी से कई ने मुहूर्त निकाले। कहां तो खुद के प्रचार के लिए ठाकुर साहब सड़क पर उतर रहे थे कि कहां ये फांस आन पड़ी।