चुनावी
मौसम में दोयम दर्जे के नेताओं-कार्यकर्ताओं में बड़े नेताओं के सामने
नंबर बढ़वाने की होड़ सी है।
राजधानी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही
मैदान में हैं तो भाजपा का हर छोटा-बड़ा उनके चुनाव में अपनी भूमिका साबित
करने में जुटा है।
मीडिया मैनेजमेंट को लेकर खास तौर पर होड़ मची है। कोई
पत्रकार पहली बार किसी भाजपा कार्यकर्ता या नेता से रू-ब-रू होता है, तो वह
फौरन बड़े अदब से उसे अपने से वरिष्ठ नेता के पास ले जाता है।
परिचय
करवाता है, ‘अमुक जी हैं, वरिष्ठ पत्रकार हैं, मेरे बरसों पुराने मित्र
हैं...।’
बेचारे पहली दफा पार्टी दफ्तर में कदम रखने वाले पत्रकार भी चक्कर
में पड़ जाते हैं कि पहली बार में ही पुराना परिचय कैसे निकाल लिया।
खैर, जो भी हो, नंबर बढ़ाने का यह फंडा इन दिनों भाजपा में खूब आजमाया
जा रहा है।