पुलिस अफसरों का हाल निराला है। जब भी चुनाव आते हैं, अफसर केंद्र से अधिक से अधिक अतिरिक्त फोर्स मांगने की जुगत में लग जाते हैं।
ऐसे में न सिर्फ संवेदनशील जगहों की संख्या को बढ़ाकर दिखाया जाता है, बल्कि चुनाव के माहौल की गंभीरता की रिपोर्ट भी ऊपर तक भेजी जाती है।
इसके बावजूद जब अफसरों की अपेक्षा के मुताबिक बल नहीं मिलता तब अफसर इस बात को छिपाने की कोशिश करने लगते हैं कि केंद्र ने कितनी फोर्स भेजी।
बीते लोकसभा चुनाव में भी अफसर चुनाव आयोग का नाम लेकर केंद्र से मिले फोर्स की जानकारी देने में कतराते रहे। अब उपचुनाव में अपेक्षा से अधिक फोर्स मिलने पर भी इसकी सही संख्या बताने में कतराने लगे।
गृह विभाग के एक अफसर ने इस पर टिप्पणी की कि पुलिस के अफसर हैं इन्हें किस बात पर शर्म आ जाए पता नहीं। कम से कम किसी बात पर आ तो रही है।