परिवहन निगम में गोंडा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) वीरेंद्र कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को महज एक प्रतिकूल प्रविष्टि देकर खत्म कर दिया गया। जबकि निगम के मुख्य प्रधान प्रबंधक संचालन राजीव चौहान ने जांच में इन्हें दोषी ठहराया था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक वीरेंद्र कुमार ने बिना टिकट यात्री ढोने के मामले में जो संविदा कंडक्टर पकड़े गए थे, उन्हें बर्खास्त करने के बजाय जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। इन कंडक्टरों को चेकिंग के दौरान एक बस में आठ-आठ यात्रियों को बिना टिकट ले जाते हुए पकड़ा गया था। इन मामलों के निस्तारण में एआरएम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बिना टिकट पांच यात्रियों को ढोने पर संविदा कंडक्टरों को बर्खास्त किया जाना चाहिए था।
जांच में एआरएम वीरेंद्र कुमार पर लगे आरोप सही पाए हैं। ऐसे में उन्हें बड़ा दंड मिलना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अनुशासनिक अनुभाग के कार्मिकों से साठगांठ कर दंड को कम करा लिया। उन्हें निलंबित किए जाने के बाद उनके कार्यकाल की वृहद जांच होनी चाहिए थी। मगर, जांच रिपोर्ट के बाद वीरेंद्र कुमार को महज प्रतिकूल प्रविष्टि देकर मामले को खत्म कर दिया गया। इस बाबत मुख्य प्रधान प्रबंधक प्रशासन एसके दुबे ने आदेश जारी किया।
किस कंडक्टर को कितनी बार बिना टिकट यात्री ढोने पर पकड़ा गया
संविदा कंडक्टर बार
कृष्ण कांत मिश्रा 5
देवेंद्र नाथ चतुर्वेदी 5
धर्मेंद्र प्रताप सिंह 5
सुरेंद्र कुमार ओझा 8
सुनील कुमार शुक्ला 5