लखनऊ। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में शशिभूषण महिला महाविद्यालय में बीए की 500 सीटों में से 50 पर दाखिले ही नहीं हुए। राजधानी के बाकी महिला महाविद्यालयों की हालत इससे कुछ बेहतर रही, पर सीटें वहां भी खाली रहीं। राजधानी के ब्वॉयज कॉलेज तो एक-एक कर कोएड में बदल गए जबकि एक भी महिला महाविद्यालय में सहशिक्षण की शुरुआत नहीं हो सकी।
राजधानी में इस समय 20 से ज्यादा अनुदानित महाविद्यालय हैं। ये सभी लखनऊ विश्वविद्यालय से सहयुक्त हैं। लविवि हर साल करीब पांच नए महाविद्यालयों और 50 के करीब नए पाठ्यक्रमों को मान्यता देता है। नए कोर्स और अन्य वजह से राजधानी के अनुदानित महाविद्यालयों में सीटें भरने का संकट खड़ा हो गया है। गत वर्ष कुछ को छोड़कर ज्यादातर अनुदानित महाविद्यालयों की सीटें नहीं भर सकीं। महिला महाविद्यालयों की हालत और भी खराब रही है। इसके चलते इन महाविद्यालयों में सहशिक्षण की शुरुआत करने की मांग उठाई जा रही है। तर्क है कि इससे वहां दाखिले के विकल्प बढ़ेंगे।
ब्वॉयज कॉलेज से सहशिक्षण में परिवर्तित हुए महाविद्यालय
श्री जय नारायण मिश्रा महाविद्यालय, बीएसएनवी पीजी कॉलेज, नेशनल पीजी कॉलेज, कालीचरण डिग्री कॉलेज, लखनऊ क्रिश्चियन पीजी कॉलेज, डीएवी महाविद्यालय।
कुछ महिला महाविद्यालयों में दाखिले की स्थिति-
महिला महाविद्यालय- बीए में 900 सीट पर 200 प्रवेश, बीएससी में 480 सीट पर 180 दाखिले, बीकॉम की 60 सीट पर 40 प्रवेश।
खुनखुनजी कॉलेज- बीए में 485 सीट पर 205 प्रवेश, बीकॉम में 60 सीट पर 13 प्रवेश।
मुमताज कॉलेज- बीए की 650 सीट पर 250 प्रवेश, बीएससी में 280 पर 60 और बीकॉम की 60 पर 20 दाखिले।
एपीसेन मेमोरियल- बीए की 470 सीट पर 250 प्रवेश, बीकॉम की 80 सीट पर 30 प्रवेश।
कोट-
महिला विद्यालयों में हो सहशिक्षा की शुरुआत
राजधानी के महिला विद्यालयों में दाखिले की स्थिति खराब हो रही है। जगह-जगह डिग्री कॉलेज खुल चुके हैं। महिला महाविद्यालयों में सिर्फ पड़ोस की छात्राएं ही दाखिला ले पाती हैं। इससे उनके यहां सीटें नहीं भर रही हैं। सहशिक्षा की शुरुआत होने पर वहां छात्रों के लिए भी विकल्प खुलेंगे।
- प्रो. अंशू केडिया, प्राचार्य खुनखुनजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज
कॉलेज प्रबंधन करें पहल
महाविद्यालयों में कम दाखिले की वजह ज्यादा कॉलेज खुलने के बजाय गुणवत्ता भी एक बड़ी वजह है। इसलिए कॉलेजों को अपने यहां शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा होने पर उनके यहां दाखिलों की संख्या बढ़ेगी। बाकी सहशिक्षा शुरू करने के लिए कॉलेज प्रबंधन को अनुमति लेनी चाहिए।
प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि
इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरूरत
महिला महाविद्यालयों में सहशिक्षा शुरू करने पर उनको कुछ अतिरिक्त मानक पूरे करने होंगे। इसके लिए उनको अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा। तभी वे अपने यहां सहशिक्षा की शुरुआत कर पाएंगे।
डॉ. मौलिंदु मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष, लविवि सहयुक्त कॉलेज शिक्षक संघ