रायबरेली। जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कराने में विभाग को पसीना आ रहा है। 12 करोड़ रुपये खर्च कर 10 स्कूलों के हॉस्टलों के भवन तैयार हैं, लेकिन अब तक विभाग ने भवनों पर कब्जा नहीं लिया है। जिससे छात्राओं के सामने ठहरने की समस्या है। नौ हॉस्टलों के भवन पिछले कई माह से अफसरों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
जिले के सभी ब्लॉकों में गरीबों की बेटियों को आवासीय शिक्षा की सुविधा देने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल संचालित हैं। अब तक कक्षा आठ तक की पढ़ाई हो रही थी। कक्षा 12 तक आवासीय शिक्षा की सुविधा दिलाने के लिए जिले के अमावां, छतोह, डीह, दीनशाह गौरा, जगतपुर, सलोन, महराजगंज, डलमऊ, डीह व शिवगढ़ में करीब 12 करोड़ की लागत से छात्रावासों के निर्माण का काम शुरू कराया गया।
समाज कल्याण निर्माण निगम की ओर से शिवगढ़ छोड़ शेष नौ छात्रावासों के भवनों का काम पिछले कई माह पहले ही पूरा करा दिया। शासन की मंशा थी कि इसी शिक्षा सत्र से कक्षा नौ से कक्षा 12 तक की पढ़ाई शुरू कराई जाए, लेकिन हॉस्टलों को हैंडओवर न लेने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कक्षा नौ में छात्राओं का दाखिला लिया भी गया है, लेकिन उनके सामने ठहरने की समस्या है। अब तक विभाग भवनों को कार्यदायी विभाग से नहीं लेगा तब तक उनका उपयोग नहीं किया जा सकता है।
कमेटी गठित, एक अगस्त से होगी प्रक्रिया
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों के हॉस्टलों को हैंडओवर में लेने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कमेटी का गठन किया गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ ही विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि डीएम के स्तर से कमेटी गठित हो गई है। एक अगस्त से भवनों को हैंडओवर में लेने का काम शुरू होगा।
10 कस्तूरबा स्कूलों में हॉस्टल के लिए भवनों का निर्माण कराया गया। इसमें नौ भवनों के पूर्ण होने की सूचना है। डीएम के स्तर से कमेटी गठित की गई है। कमेटी भवनों की गुणवत्ता की जांच करके उन्हें हैंडओवर में लेने की प्रक्रिया एक अगस्त से शुरू करेगी। जल्द ही काम पूरा होगा।
शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए