इसे डॉक्टर की लापरवाही कही जाए या फिर मां की बदकिस्मती कि महज कुछ घंटे में ही वक्त ने उसकी बेटी की जिंदगी छीन ली।
सूत्रों के मुताबिक हुसैनगंज निवासी नीतू चौहान रविवार सुबह अपनी 12 साल की बेटी उन्नति के पेट में दर्द होने से उसे सिविल अस्पताल लेकर आईं थीं।
डॉक्टर नितिन मिश्रा ने उसकी जांच की और फटाफट तीन इंजेक्शन लगाकर यह कह घर भेज दिया कि जल्द ही आराम मिल जाएगा।
घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद ही उन्नति की तबियत और बिगड़ने लगी। उसे फिर से सिविल अस्पताल लाया गया जहां कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।
इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। उनका कहना था कि डॉक्टर ने इलाज करने में लापरवाही की है।
पीआईसीयू के सामने हंगामा बढ़ते ही भीड़ इकट्ठा हो गई और मामला तूल पकड़ने लगा। माहौल इतना खराब हो गया कि एसीएम विनोद कुमार को मौके पर पहुंचना पड़ा।
सूत्रों ने बताया कि परिजन नहीं चाहते थे कि बच्ची का पोस्टमार्टम किया जाए, लेकिन पुलिस और अस्पताल प्रशासन इसके खिलाफ थे।
मृतका उन्नति की मां का कहना था कि उनके पति गोरखपुर में रहते हैं। वह लखनऊ आने वाले हैं, घर का कोई सदस्य नहीं चाहता है कि पोस्टमार्टम किया जाए।
एसीएम घरवालों को समझा-बुझा ही रहे थे तभी पुलिस की गाड़ी में रखी उन्नति की शव तक कुछ परिजन पहुंच गए और शव को लेकर भागने लगे। पुलिस उनके पीछे भागी और शव को कब्जे में लेकर मर्चरी चली गई। बदहवास परिजन देखते ही रहे।
विनोद कुमार ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चूक कहां हुई।