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Lucknow News: शायरी में उभरा गालिब का अक्स, संगीत और नृत्य से सजा मंच

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लखनऊ। होगा कोई ऐसा भी कि गालिब को न जाने...। संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में शुक्रवार को इसी मिसरे की गूंज के साथ एक अद्भुत सांस्कृतिक संध्या ‘बयान-ए-गालिब’ का आयोजन हुआ। यह महान शायर मिर्जा गालिब को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि रही। 399 रुपये की टिकट के साथ हर दर्शक शो देखने के लिए बेकरार दिखा। कार्यक्रम की शुरुआत गालिब के जीवन और उनके पात्रों से प्रेरित कथानक से हुई, जिसे गालिब विशेषज्ञ सैयद कबीर अहमद ने अपनी प्रभावशाली आवाज और प्रस्तुतिकरण से जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति के निर्माता सुधांशु मणि ने गालिब की चुनिंदा गजलों की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।डॉ. प्रभा श्रीवास्तव की आत्मा को छू जाने वाली गायकी ने सभागार को गालिब के दौर में पहुंचा दिया, वहीं डॉ. कुमकुम धर की शिष्याओं के प्रस्तुत कथक नृत्य ने हर शेर को रंग, लय और भाव में पिरोकर मंच पर उतार दिया। रोशनी, मंच सज्जा और ध्वनि संयोजन का निर्देशन रंगकर्मी गोपाल सिन्हा ने बखूबी संभाला। कार्यक्रम में गालिब के उन पहलुओं को भी दर्शाया गया, जो अक्सर शायरी से परे रह जाते हैं। उनके पत्र, उनकी जीवनशैली, उनका दर्द, और उनका हास्यबोध। इस दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
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