लखनऊ। अवैध रूप से हलाल प्रमाणपत्र जारी करने के पीछे करोड़ों रुपये की वसूली का खेल है। संस्थाएं कंपनियों से रकम वसूलती हैं तो वहीं कंपनियां इसी प्रमाणपत्र के नाम पर विदेश में उत्पादों की बिक्री बढ़ाकर मोटी रकम कमा रही हैं। एसटीएफ की जांच में इस पूरे खेल का राजफाश हुआ है। जांच में ये भी साफ हो गया कि प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया ही फर्जी है। संस्था प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृति ही नहीं है। एसटीएफ के डीएसपी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकारा कि वह मीट उत्पाद के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के लिए भी हलाल सर्टिफिकेट जारी करते थे। इसका मकसद सिर्फ खाड़ी देशों में इन उत्पादों की बिक्री बढ़ाना था। जबकि मीट के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए इस प्रमाणपत्र की जरूरत ही नहीं होती है।
वहीं, जो प्रमाणपत्र आरोपी जारी करते थे उसके लिए ये अधिकृत ही नहीं हैं। इसकी पुष्टि नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज से भी की गई। जिसके बाद साफ हो गया कि हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से जो भी हलाल प्रमाणपत्र जारी किए गए वह फर्जी हैं।
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह एक कंपनी को हलाल प्रमाणपत्र देने के लिए दस हजार रुपये लेते थे। बाद में कंपनी के जितने उत्पाद होते थे, उसके लिए प्रति उत्पाद एक-एक हजार रुपये लेते थे। इस तरह से ये करोड़ों रुपये का खेल करते थे। वैध रूप से जो प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृति हैं, वो संस्थाएं उत्पादों की लैब में टेस्टिंग करती हैं। तब वह प्रमाणपत्र जारी करती हैं। यहां आरोपी सिर्फ रकम वसूल कर चंद मिनट में प्रमाणपत्र जारी कर देते थे।
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ आरोपियों ने तमाम रेस्टोरेंट को भी हलाल प्रमाणपत्र जारी किए हैं। जो हलाल प्रमाणपत्र का हवाला देकर खाद्य सामग्री परोसते हैं। इसके पीछे यही मकसद है कि विशेष वर्ग के लोग संबंधित रेस्टोरेंट और होटल में जाएं और वहां आमदनी बढ़े।
एसटीएफ ने आरोपियों से प्रमाणपत्र जारी करके कमाई गई रकम का लेखा-जोखा मांगा। इस पर वह कोई हिसाब नहीं दे सके। मतलब जो भी पैसा वसूल रहे हैं वह भी अवैध तरीके से ले रहे हैं। एसटीएफ ने आरोपियों के बैंक खाते समेत अन्य जानकारी भी जुटाई है।
केस में कई संस्थाएं आरोपी हैं। एसटीएफ सभी की भूमिका जांच रही है। जिन-जिन के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं उन पर कार्रवाई की गई है। अन्य के खिलाफ सुबूत जुटाने की जद्दोजहद जारी है। ऐसे में कइयों पर कार्रवाई तय है।