रायबरेली। सदर तहसील क्षेत्र के सराय मोहम्मद शरीफ गांव में हवाई पट्टी की करीब ढाई बीघा जमीन जालसाजी करके पहले अपने नाम कराई, फिर जालसाजों ने उसे बेच डाला। लखनऊ-प्रयागराज हाईवे के किनारे जमीन होने के कारण इसकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। करीब नौ साल पहले हुए जमीन के घपले में शुक्रवार को एसडीएम सदर मिथलेश कुमार त्रिपाठी ने आठ फरवरी 2014 के आदेश को निरस्त करने के साथ ही बैनामों को शून्य करने का आदेश जारी कर दिया। दोषियों पर कार्रवाई के लिए तहसीलदार सदर को जांच सौंपी है।
सदर तहसील के लखनऊ-प्रयागराज हाईवे के किनारे सराय मोहम्मद शरीफ गांव में गाटा संख्या 249, 333, 425 हवाई पट्टी के नाम अंकित थी। गांव के रणधीर सिंह पुत्र राज बहादुर सिंह ने तहसील दिवस में चार सितंबर 2021 को शिकायत करके मामले की जांच कराने और कार्रवाई की मांग की थी। तत्कालीन तहसीलदार की रिपोर्ट आने के बाद जमीन घपले की पोल खुल गई। तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गाटा संख्या 249, 333, 425 की करीब ढाई बीघा जमीन आठ फरवरी 2014 को विजय बहादुर सिंह के नाम कर दी गई थी। चार साल बाद 26 फरवरी 2018 को खतौनी पर अमलदरामद करा दी गई।
जमीन के अमलदरामद होने के बाद विजय ने पूरे गौतम मजरे बेलाखरा निवासी रोहित सिंह, शहर के तिलकनगर निवासी केशव शरण सिंह पुत्र चंद्रभूषण सिंह, साधना पत्नी काशीनाथ सिंह को जमीन बेच दी। केशव शरण सिंह की मौत के बाद जमीन पत्नी आशा सिंह व बेटों राजीव व रोहित के नाम वरासत हो गई। मामले में शुक्रवार को एसडीएम ने आदेश जारी करके फर्जी तरीके से जमीन दूसरे के नाम दर्ज करने के आठ फरवरी 2014 के आदेश को निरस्त करने के साथ ही सभी बैनामों की शून्य घोषित कर दिया।
जालसाजी के मामले की जांच तहसीलदार सदर को सौंपी है। तहसीलदार को 15 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। एसडीएम मिथलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सराय मोहम्मद शरीफ गांव में फर्जी तरीके से विजय के नाम जमीन अंकित करा दी गई थी। संबंधित आदेश निरस्त करने के साथ ही बैनामों को शून्य घोषित किया गया है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधितों पर आगे की कार्रवाई होगी।