बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में हुई मासूमों की मौतों का कारण बनी लिक्विड ऑक्सीजन के भुगतान की फाइल लटकाने में चीफ फार्मासिस्ट और तीन बाबू नप गए हैं। चीफ फार्मासिस्ट को पीएचएमएस के डायरेक्टर जनरल ने निलंबित किया है तो वहीं तीन लिपिकों को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने निलंबित कर दिया है। प्राचार्य की इस कार्रवाई से कर्मचारियों में खलबली है।
10-11 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित हो गई थी। ऑक्सीजन संकट के बीच कॉलेज के नेहरू अस्पताल में भर्ती कई मासूमों की मौत हो गई थी। मामला सुर्खियों में आया तो जीवनरक्षक ऑक्सीजन जैसे संवेदनशील मामले में भारी लापरवाही भी उजागर हुई।
शासन के निर्देश पर मामले में तत्कालीन प्राचार्य का निलंबन करके उन्हें डीजी हेल्थ कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इसके साथ ही फंड होने के बाद भुगतान लटकाने को लेकर चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल और तीन लिपिकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए। डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई तो इसमें भी ये दोषी मिले। मुख्य सचिव की हाई लेवल कमेटी की जांच के बाद अब प्राचार्य ने इनके खिलाफ कार्रवाई की है।
गुरुवार को भुगतान लटकाने को लेकर चीफ फार्मासिस्ट गजनान जायसवाल को डायरेक्टर जनरल ने निलंबित कर दिया। वहीं प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी, उदय शर्मा और सुधीर पांडेय के निलंबन का आदेश जारी किया। इनमें संजय कुमार त्रिपाठी और उदय को निलंबन का आदेश रिसीव करा दिया गया है।
सुधीर पांडेय को आदेश रिसीव कराने के लिए जब कर्मचारी पहुंचा तो वह गायब मिले। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि सुधीर को भी निलंबन आदेश जल्द ही रिसीव करा दिया जाएगा। इस मामले से जुड़े अन्य लोगों पर कार्रवाई शासन एवं उच्चाधिकारियों के स्तर से की जाएगी। उन पर कार्रवाई मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।