रायबरेली। पाकिस्तान से आकर रायबरेली में बसे चार शरणार्थी परिवार पिछले 15 साल से भारतीय नागरिकता के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। 2009 से कई बार नागरिकता के लिए अर्जी की, लेकिन कोई न कोई खामी दिखाकर आवेदनों को खारिज कर दिया गया। अब सीएए कानून आने के बाद चारों सिंधी परिवार के लोगों को नागरिकता मिलने की उम्मीद जग गई है। नए कानून के तहत आवेदन भी किया गया है। चारों परिवारों में वर्तमान समय में 16 सदस्य हैं।
1987 से लेकर 1991 के बीच पाकिस्तान छोड़कर चार सिंधी परिवार के लोग रायबरेली आकर बस गए। बानोमल, कुमार लाल, मुरलीलाल और हरीश शहर में रहकर किसी तरह परिवार को चला रहे हैं। 2009 में पहली बार नागरिकता के लिए आवेदन किया, लेकिन आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसके बाद भी कई बार प्रयास किया, लेकिन बार-बार कोई न कोई खामी दिखाकर आवेदनों को निरस्त कर दिया गया।
नागरिकता के संबंध में नया कानून बनने और जिले में शासनादेश आने के बाद चारों सिंधी परिवार के लोगों को नागरिकता मिलने की उम्मीद जग गई है। नए कानून के तहत आवेदन भी कर दिया है। चुनाव के बाद नागरिकता मिलने की उम्मीद है।
गांवों में फेरी लगाकर चला रहे अपना परिवार
पाकिस्तान से आए शरणार्थी बानोमल और हरीश दुकानों से सामान लेकर गांवों में फेरी करके उसकी बिक्री करते हैं। इससे जो कमाई होती है, उसी से परिवार चलाते हैं। इसके अलावा कुमार लाल और मुरलीलाल के भाई नौतनलाल ने शहर के बेलीगंज में कंपट-बिस्कुट की दुकान खोल रखी है। नागरिकता न मिलने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसी तरह परिवार की गाड़ी को चला रहे हैं।
..फिर सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ
पाकिस्तान से आए शरणार्थी मुरलीलाल, बानोमल, कुमार लाल और हरीश के परिवार के लोगों को खुशी है, कि नए कानून से अब उन्हें भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। बानोमल का कहना है कि 2009 से नागरिकता के लिए प्रयास कर रहे हें, लेकिन कोई न कोई बहाना करके आवेदनों को खारिज कर दिया जा रहा है। अब नए कानून के तहत आवेदन किया है। चुनाव के बाद नागरिकता मिलने की उम्मीद है। नागरिकता मिलने के बाद सभी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।