लखनऊ। नाबालिग से दुराचार के 29 साल पुराने मामले में कोर्ट ने माधो सोनकर, सुभाष, मनोज कुमार और चंद्रवती को दोषी ठहराया है।
एडीजे नरेंद्र कुमार ने माधो को आठ साल की कैद और बीस हजार के जुर्माने, सुभाष व मनोज को आठ-आठ साल की जेल व दस-दस हजार के जुर्माने और चंद्रवती को सात साल की कैद और पांच हजार के जुर्माने से दंडित किया है। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी रहे मुकेश सोनकर और राजू यादव की मौत हो गई थी।
सरकारी वकील शिवाधर द्विवेदी और अरविंद मिश्रा ने बताया कि मामले कि रिपोर्ट वादी ने दो फरवरी 1994 को कृष्णनगर थाने में दर्ज कराई थी।
इसमें कहा गया था कि वादी की 15 वर्षीय बेटी 31 जनवरी की दोपहर अपनी बुआ के घर गई थी, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी।
खोजबीन में पता चला कि बेटी को मोहल्ले के राम शरण यादव का भतीजा राजू यादव अपने अन्य दोस्तों के साथ बहला-फुसलाकर ले गया है। पुलिस की विवेचना में सामने आया था कि आरोपी राजू ने साथियों के साथ मिलकर नाबालिग का अपहरण कर दुराचार किया था।
बच्ची से दुराचार के दोषी को उम्रकैद
लखनऊ। घर में चार साल की बच्ची से दुराचार करने वाले दीपू को पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार उपाध्याय ने आजीवन कारावास और तीस हजार के जुर्माने से दंडित किया है। सरकारी वकील सुखेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वादी ने गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताय था कि 10 फरवरी 2018 को वादी मजदूरी करने गया था, जबकि उसकी पत्नी निमंत्रण में गई थी और वादी की छह वर्ष व चार वर्ष की पुत्रियां घर पर अकेले थीं। बताया कि इस बीच दोनों बच्चियों को अकेला पाकर दीपू खाना देने के बहाने अपने घर ले गया। आगे बताया कि आरोपी ने बड़ी बेटी को खाना देकर बाहर जाने के लिए कहा और छोटी बेटी को कमरे में ले जाकर दुराचार किया।