पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में खुद को फंसाए जाने के एवज में राज्य सरकार से 10 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भी भेजा है। ठाकुर ने पत्र में लिखा कि सतर्कता अधिष्ठान के तत्कालीन अधिकारियों ने जानबूझकर उच्चस्तरीय दबाव में उनके खिलाफ गलत रिपोर्ट भेजी थी। इसमें उन्हें आय से अधिक संपत्ति का दोषी बताया गया था। उनके खिलाफ थाना गोमती नगर लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें व उनके परिवार को आठ साल तक विजिलेंस छापा, लंबी पूछताछ समेत कई परेशानियां और प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पिछले दिनों मामले में ईओडब्ल्यू ने अंतिम रिपोर्ट लगाई, जिसे लखनऊ कोर्ट ने स्वीकार कर लिया गया है। इससे साफ है कि फर्जी तरीके से फंसाया गया। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने मामले में मुआवजा देने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
पूर्व आईपीएस को क्लीनचिट देने वाली एफआर कोर्ट ने स्वीकारी
आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को क्लीनचिट देने वाली भ्रष्टाचार निवारण संगठन की फाइनल रिपोर्ट को भ्रष्टाचार निवारण की विशेष न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया है। गौरतलब है कि सितंबर 2015 में सतर्कता अधिष्ठान ने गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें अमिताभ ठाकुर पर आय के ज्ञात स्रोत से 98 लाख रुपये अधिक अर्जित करने का आरोप लगाया गया था। ईओडब्ल्यू के विवेचक ने पूर्व आईपीएस को क्लीनचिट देते हुए शासन से अनुमोदन के बाद अक्तूबर 2018 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट में भेजी थी।