रायबरेली। मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवंटित बजट राशि के खर्च में बंदरबांट करने के मामले में बीसीपीएम (ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस प्रबंधक) को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की जांच में सामने आया कि डीह सीएचसी में तैनात बीसीपीएम ने खुद की फर्म बनाकर सप्लाई के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया। जांच रिपोर्ट पूरी होते ही आरोपी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय होगी।
जिले की 19 सीएचसी और 54 पीएचसी को रोगी कल्याण समिति के माध्यम से मरीजों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हर साल बजट आवंटित होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में 98 लाख रुपये रुपये से अधिक का बजट अस्पतालों को दिया गया था। बजट राशि खर्च होने के बावजूद अस्पतालों में इलाज से जुड़ी सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं दिखा। अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने इस मामले की जांच शुरू की। अब तक हुई जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि एमएस लक्ष्य इंटरप्राइजेज का संचालक स्वयं डीह सीएचसी में तैनात बीसीपीएम है। जीएसटी भी बीसीपीएम ने अपने नाम ही जारी कराई है।
इतना ही नहीं रोगी कल्याण समिति का भुगतान भी इसी फर्म के खाते में किया गया। सीएचसी स्तर पर रोगी कल्याण समिति के बजट के बंदरबांट में मानकों को भी ध्यान में नहीं रखा गया। बिना टेंडर व कोटेशन के ही फर्मों से खरीद फरोख्त का काम कर लिया गया। अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि डीह सीएचसी में तैनात बीसीपीएम और उसकी फर्म की जांच में अब तक कई साक्ष्य मिले हैं। इसके बाद सीएमओ से शिकायतकर्ता का बयान लेकर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। जांच पूरी होते ही आरोपी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तय होगी।