लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फार्मेसी की पढ़ाई विदेशी विद्यार्थियों के मन को भा रही है। यहां पहली बार सूडान, तजाकिस्तान और बांग्लादेश से विद्यार्थी बीफार्मा की पढ़ाई के लिए पहुंचे हैं। तीनों देशों से एक-एक छात्र ने फार्मा के तीन वर्षीय बैचलर कोर्स में प्रवेश लिया है।
लविवि में सत्र 2021-22 में फार्मेसी संकाय की स्थापना की गई थी। इसके अंतर्गत विभाग में बीफार्मा (बैचलर ऑफ फार्मेसी) और डिप्लोमा इन फार्मेसी (डीफार्मा) की पढ़ाई शुरू की गई। बीते सत्र तक विवि इन कोर्स में एकेटीयू के माध्यम से प्रवेश लेता था। लेकिन इस बार में प्रवेश में देरी के चलते विश्वविद्यालय ने अपने स्तर से प्रवेश लिए हैं।
बीफार्मा की सभी सौ सीटों पर सीयूईटी यूजी की काउंसिलिंग के माध्यम से आवेदन मांगे गए थे जो काउंसिलिंग के दिन ही भर गई थीं। इसके साथ ही ईडब्ल्यूएस की भी 10 सीटों पर प्रवेश लिए गए हैं। डीफार्मा की 60 सीटों पर विवि ने प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले लिए हैं।
रोजगार के अधिक अवसर कर रहे आकर्षित
कोरोना महामारी के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं। सरकार की ओर से चिकित्सा सेवा को बेहतर करने के लिए हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। इससे पहले के मुकाबले अधिक संख्या में डॉक्टर तैयार होंगे तो वहीं फार्मासिस्ट की जरूरत भी बढ़ रही है। यह फार्मा के विद्यार्थियों को रोजगार दिलाने में सहायक होगी।
आईसीएसएसआर के माध्यम से हुए दाखिले
बीफार्मा में प्रवेश के लिए तीनों देशों के विद्यार्थियों ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के माध्यम से आवेदन किया था। संस्था भारत में अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को परियोजनाओं, फेलोशिप, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सेमिनार, क्षमता निर्माण के लिए अनुदान देती है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है हमारी पहचान
लविवि अपनी क्षमता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दम पर विश्व में अपनी छाप छोड़ रहा है। इसी की देन है कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी पढ़ाई के लिए यहां रुख कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि विद्यार्थी जिस उद्देश्य से लविवि आया है, वह पूर्ण हो।
- प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि