लखनऊ। लॉकडाउन में अभिभावकों पर निजी कॉलेजों द्वारा फीस जमा करने का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। पहले कॉलेज प्रबंधन मोबाइल पर मेसेज भेजकर फीस जमा करने की अपील करता था। लेकिन जब अधिकांश अभिभावकों ने मेसेज को गंभीरता से नहीं लिया तो कॉलेज के शिक्षक अब अभिभावकों को फोन करके फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। शिक्षक रिकवरी एजेंट की भूमिका में हैं। जब से माहवार फीस लेने की स्कूलों को छूट मिली है तबसे कॉलेजों का दबाव बढ़ने लगा है। स्कूलों कॉलेजों द्वारा फीस जमा करने की अपील अब अभिभावकों पर दबाव बनती जा रही है। पहले यह अपील केवल मेसेज तक ही सीमित थी, लेकिन अब बेवक्त अभिभावकों को फोन कर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। लॉकडाउन में स्कूल मार्च के मध्य से बंद है। कुछ ही बड़े स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अभिभावकों से एडवांस में तीन महीने की फीस जमा करा ली है। जबकि ज्यादातर स्कूल व कॉलेज में अप्रैल-मई की फीस जमा नहीं कराई गई। स्कूलों ने जब अभिभावकों से फीस मांगना शुरू किया तो पहले शासन प्रशासन द्वारा अप्रैल, मई और जून तीन महीने की फीस बाद में समायोजित करने का निर्देश जारी किया गया। लेकिन कुछ समय बाद स्कूल व कॉलेजों को माहवार फीस लेने की छूट दे दी गई। लॉकडाउन में सभी स्कूल व कॉलेज ऑनलाइन शिक्षण कार्य करा रहे हैं। इस दौरान स्कूल अभिभावकों को लगातार मेसेज भेजकर महीने की फीस जमा करने की अपील करने लगे। लेकिन अभिभावकों ने स्कूलों के मेसेज को गंभीरता से नहीं लिया। अब मई माह में स्कूलों के शिक्षक अभिभावकों को कॉल कर सीधे फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। यही नहीं शिक्षक वीडियो बनाकर ही फीस जमा करने की अपील कर रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से फीस जमा कराए जाने का दबाव हम पर बनाया जा रहा है। जिम्मेदारी दी गई है कि क्लास के सभी छात्रों की फीस खाते में पहुंच जाए। हमें इसका हिसाब देना पड़ता है कि कितने अभिभावकों से बात की और कितने अभिभावकों ने फीस जमा की उसका सबूत भी स्कूल को देना पड़ रहा है। स्कूल कॉलेज हर माध्यम से फीस लेने को तैयार है चेक के जरिए, ऑनलाइन आरटीजीएस के जरिए और कार्यालय में काउंटर के जरिए फीस जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। स्कूल इसके पीछे समस्त स्टाफ को वेतन में देने में आ रही दिक्कतों का कारण बता रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों द्वारा फीस जमा करने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि ऐसा हो रहा है तो शिकायत आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। निजी स्कूलों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बताया कि अभी तक स्कूलों में करीब 15 प्रतिशत फीस ही जमा हो पाई है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में शिक्षकों और बाकी स्टाफ का वेतन दिया गया। किसी प्रकार की कटौती भी नहीं की गई। लेकिन अब यदि फीस जमा करने की रफ्तार तेज नहीं हुई तो मई और जून में स्टाफ को वेतन देने में कठिनाई होगी। कई मझोले स्कूल तो वेतन देने से ही मना कर देंगे।