रायबरेली। पनीर के तीन और खोवा के दो नमूनों को विधि विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ ने जांच के बाद फेल घोषित कर दिया। इतना ही नहीं रिफाइंड या घटिया ऑयल मिलाकर पनीर-खोवा तैयार किए जाने की पुष्टि हुई है। पांचों नमूनों में सेहत खराब करने वाले खतरनाक तत्व मिले हैं।
नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद कारोबारियों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय अजीत कुमार राय ने खाद्य आयुक्त को पत्र भेजकर स्वीकृति मांगी है।
पिछले साल 19 नवंबर को खाद्य सुरक्षा अधिकारी शेफाली रस्तोगी ने कचौंदा नानाकारी स्थित अवस्थी ढाबा से पनीर का नमूना भरा था। राजेश तिवारी ने शहर के नयापुरवा स्थित पप्पू पनीर की दुकान से पनीर और अपराजिता तिवारी ने इसी दुकान से खोवा का नमूना भरा था। इसके अलावा बेहटा स्थित देव मिष्ठान भंडार से खोवा व मिनी औद्योगिक क्षेत्र ऊंचाहार स्थित मुरलीधर की दुकान से पनीर का नमूना भरा था। नमूनों को जांच के लिए विधि विश्लेषक प्रयोगशाला भेजा गया था।
पांचों नमूनों की प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आ गई है। प्रयोगशाला ने खोवा के दो और पनीर के तीनों नमूनों को घटिया घोषित किया है। खाद्य पदार्थों में बाहरी तेल मिला है। रिफाइंड या अन्य ऑयल का प्रयोग करके पनीर व खोवा बनाया गया था। रिपोर्ट आने के बाद संबंधितों कारोबारियों के खिलाफ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में मुकदमा करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खाद्य आयुक्त से मुकदमे के लिए स्वीकृति मांगी गई है।
तीन माह की कैद और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्र बहादुर यादव का कहना है कि पनीर, खोवा या अन्य खाद्य पदार्थों के असुरक्षित होने पर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा किया जाता है। कारोबारी पर तीन माह की सजा के साथ ही अधिकतम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। सजा और जुर्माना का निर्धारण मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करते हैं।
विधि विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ की जांच में पनीर के तीन व खोवा के दो नमूने असुरक्षित मिलने के बाद एसीजेएम कोर्ट में मुकदमे के लिए खाद्य आयुक्त से स्वीकृति मांगी गई है। जल्द ही मुकदमा करके कारोबारियों को सजा दिलाई जाएगी।
अजीत कुमार राय, सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय