लखनऊ। पहले तो विभाग ने मान-मनौव्वल कर शिक्षकों से यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं जंचवा लीं, जब मेहनताना देने का समय आया तो भेदभाव किया जा रहा है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पहले तो बुलाया और अब बाद में आने-जाने का भाड़ा नहीं दे रहे। जलपान व्यय का बिल भी गायब कर दिया है। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव सुनील यादव ने बताया कि शासन का यह व्यवहार शिक्षकों के साथ दोयम दर्जे का है। यही नहीं, जीओ में जलपान व्यय के रूप में शिक्षकों को 20 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान करने का निर्देश है। लेकिन इस बार जलपान व्यय का बिल ही नहीं बनाया जा रहा है। सुनील यादव ने बताया कि पिछली बार तो बिल बनाया गया था, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं किया गया। वहीं, मूल्यांकन में डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) की निगरानी में शिक्षक कॉपी जांचते हैं। शासन की तरफ से प्रत्येक डीएचई को 400 प्रतिदिन की दर से भुगतान करने का निर्देश है। लेकिन मूल्यांकन कार्य चाहे कितने दिन भी चला हो डीएचई को केवल 10 दिन के कार्य का ही भुगतान किया जा रहा है। इस बार कॉपी जांचने का काम 15 दिन चला था। वहीं, मार्च में जब से मूल्यांकन कार्य स्थगित हुआ था तब से शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में इस मद में पारिश्रमिक ज्वॉइनिंग से लेकर रिलीव करने की तिथि तक का दिया जाना चाहिए। वहीं, शासन ने मूल्यांकन कार्य में लगे प्रत्येक शिक्षक को 27 रुपये प्रतिदिन की दर से भाड़ा निर्धारित किया है। लेकिन यह मेहनताना उन्हीं शिक्षकों को दिया जाता है जिन्हें बोर्ड खुद तैनात करता है। लेकिन मूल्यांकन में ऐसे शिक्षकों की संख्या ज्यादा थी जो खुद कॉपी चेक करने पहुंचे और जिनको विभाग व केंद्रों ने अपने स्तर से बुलाया। इससे शिक्षकों में काफी नाराजगी है। मालूम हो कि विभाग ने पहले मूल्यांकन कार्य 16 मार्च से प्रारंभ किया। 12 लाख कॉपियों को जांचने के लिए 4000 शिक्षक तैनात कर चार सेंटर बनाए। लेकिन कोरोना के मामले बढ़ने से शिक्षकों ने मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया। इसके बावजूद शासन ने 19 मई से दोबारा मूल्यांकन शुरू कराया और नौ केंद्र निर्धारित किए। शिक्षकों की संख्या भी पांच हजार कर दी। पहले दिन तो आधे ही शिक्षक मूल्यांकन करने जैसे-तैसे पहुंचे। जैसे ही शासन ने मूल्यांकन का बजट जारी किया तो शिक्षकों की संख्या बढ़ गई। यह पहली बार था जब शासन ने मूल्यांकन कार्य के दौरान ही बजट जारी कर दिया। हर बार बजट अगले साल ही आता था। मूल्यांकन का पारिश्रमिक तत्काल खाते में आने की उम्मीद से शिक्षकों ने फटाफट मूल्यांकन कार्य निपटा दिया। इसमें काफी संख्या में वित्तविहीन विद्यालय के शिक्षक कॉपी जांचने पहुंचे थे। शिक्षकों का आरोप है कि अब मेहनताना देने की बारी आई तो उनके साथ छल किया जा रहा है।