लखनऊ। वृंदावन योजना स्थित एवरेस्ट अपार्टमेंट के फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका और कनाडा के लोगों को ठगने वाले सभी जालसाज सॉफ्टवेयर व अंग्रेजी के अच्छे जानकार हंै।
गिरोह के सरगना ने सभी को पहले टेक सपोर्ट की नौकरी के नाम पर रखा। फिर कुछ दिनों के बाद उनको जालसाजी करने की ट्रेनिंग देकर ठगी कराई जाने लगी। सभी को 30 से 35 हजार रुपये का वेतन दिया जाता था। साथ ही प्रति गिफ्ट कार्ड कमीशन भी दिया जाता था।
डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि फर्जी कॉल सेंटर चलाने का सरगना राजस्थान के भरतपुर जुरैरा का रहने वाला मोहन श्याम शर्मा है। पूछताछ में उसने बताया कि तीन माह पहले ही अपार्टमेंट में 4 बीएचके फ्लैट केबी सिंह से किराये पर लिया था। आरोपी ने बताया कि उसने दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में भी कई दिनों तक इस तरह का फर्जी कॉल सेंटर चलाया था। हर तीन से चार माह पर शहर बदल देता था।
डीसीपी ने बताया कि जालसाजों को फ्लैट देने वाले मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता नहीं चल सका है कि जालसाजों ने फ्लैट मालिक कितने रुपये में किराये पर लिया था।
गिफ्ट कार्ड लेने वाले कौन, किसी को नहीं पता
पकड़े गए जालसाजों से गिफ्ट कार्ड कौन लोग लेते थे, इसका पता आरोपियों को भी नहीं है। गिफ्ट कोड देने के लिए सिर्फ टेलीग्राम किया जाता था। ठगी में रुपयों का लेनदेन नहीं होता था। अब पुलिस इसका पता लगा रही है कि पकड़े गए जालसाजों से गिफ्ट कार्ड कौन लोग लेते थे।
खुद को माइक्रोसाॅफ्ट व एप्पल कंपनी का अधिकारी बताते, आवाज वैसी ही लगे इसलिए कॉलिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते : लखनऊ में बैठे जालसाज माइक्रोसाॅफ्ट व एप्पल कंपनी का अधिकारी बनकर बात करते थे। जालसाजों का बात करने का तरीका बिल्कुल पेशेवर होने के चलते पीड़ित को ठगी का अहसास नहीं हो पाता था। आरोपी विदेशी लोगों से बातचीत करने के लिए (X-LITE) और (eyeBeam) कॉलिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे।
ये आए गिरफ्त में
फ्लैट में रहने वाले कानपुर नगर निवासी चंदन उर्फ रिक्की, राजस्थान का मोहन, ठाकुरगंज का उत्कर्ष, रायबरेली का नीरज कुमार, हजरतगंज का करन सिंह, संतकबीरनगर का तरुण गुप्ता, दिल्ली का नीरज पांडेय, गोंडा का सिद्धार्थ कश्यप, अलीगंज का रितुराज गुप्ता, बहराइच का सोमनाथ, चंदौली का विराट कुमार व बस्ती का रामजनक।