रायबरेली। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को डिजिटलाइजेशन के विरोध में अध्यापकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर बाद विकास भवन परिसर में बीएसए दफ्तर के सामने शिक्षकों का जमावड़ा लगा रहा। मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक डिजिटलाइजेशन का दबाव न बनाएं।
जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा कि शिक्षकों की जायज मांगों में 31 उपार्जित अवकाश, 12 द्वितीय शनिवार अवकाश जैसी कई मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। शिक्षक समाज डरा और सहमा हुआ है। जिला मंत्री मुकेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आखिर शिक्षक समाज से किस बात का बदला लिया जा रहा है। महिला समिति की अध्यक्ष गीता त्रिपाठी ने बताया कि 23 जुलाई को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने कहा कि सरकार शिक्षकों को बदनाम करने में लगी है। भ्रम फैलाया जा रहा है। यादवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. चंद्रमणि बाजपेयी, दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार बच्चों से उनकी शिक्षा का हक छीनने की साजिश कर रही है।
सीनियर बेसिक शिक्षक संघ से महेंद्र वाजपेयी, डीपीए संघ से अशोक प्रियदर्शी, आदर्श शिक्षा मित्र एसोसिएशन से अजित सिंह, उर्दू बेसिक शिक्षक संघ से मोईनुल हक, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से रमेश सोनकर ने भी विचार व्यक्त किए। सभी ने कहा कि डिजिटल हाजिरी का विरोध चलता रहेगा। सरकार को हमारी मांगों पर विचार करते हुए ठोस प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर सुरेंद्र यादव, गंगाचरण भारती, नीरज हंस, अरविंद द्विवेदी, राकेश द्विवेदी, संजय सिंह, राजेश पांडेय, विनोद अवस्थी, शेखर यादव आदि मौजूद रहे।