लखनऊ। निजी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज से बीएएमएस की फर्जी डिग्री मामले में रजिस्ट्रार ने अभी तक यूपी के दोनों छात्रों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई है। आरोप है कि फर्जी डिग्र्री के रैकेट के तार विभाग से जुड़े हैं। ऐसे में अफसर कार्रवाई की बजाए लीपापोती में जुटे हैं। रजिस्ट्रार एफआईआर दर्ज किए जाने के लिए तहरीर भेजे जाने का दावा कर रहे हैं। वहीं पुलिस अभी तक तहरीर न मिलने की बात कह रही है। वहीं तीन अन्य छात्रों का रिकाॅर्ड अभी तक कॉलेजों से नहीं मिला है।
एमबीबीएस, आयुर्वेद, यूनानी व होम्याेपैथिक विधा में दाखिले के लिए वर्ष 2016 से नीट परीक्षा अनिवार्य है। बिना नीट परीक्षा के छात्रों का दाखिला लिया गया था। इसमें मेरठ के निजी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज से दो छात्रों की फर्जी डिग्री व इंटर्नशिप होने का रिकाॅर्ड कॉलेज से दस दिन पहले भेजा गया था। रजिस्ट्रार ऑफिस से दोनों छात्रों पर मुकदमा दर्ज किए जाने के लिए तहरीर पुलिस को भेजने का दावा किया गया है।
वहीं पुलिस ने अभी तक तहरीर न मिलने का दावा किया है। ऐसे में इस फर्जी डिग्री के रैकेट में शामिल लोगों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। वहीं भुवनेश्वर के निजी कॉलेज से तीन छात्राें का रिकॉर्ड अभी तक नहीं मिला है। ऐसे में संशय की स्थिति बनी है। आयुर्वेद-यूनानी व तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड कार्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा ने बताया कि दो छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के लिए तहरीर दी गई है।