सतांव (रायबरेली)। ब्लॉक क्षेत्र से होकर निकली टिकरा माइनर की सफाई में केवल खानापूरी की जाती है। यही वजह कि पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच रहा है। माइनर में उगी बड़ी-बड़ी झांड़ियां पानी की आपूर्ति में रोड़ा बन रही है। किसानों ने बताया कि पिछले तीन साल से पूरी माइनर की सफाई नहीं कराई गई। पानी इतना कम आता है कि इसका लाभ किसान नहीं उठा पाते।
नरौका रजबहा से निकली टिकरा माइनर से नरौका, देदानी, पुरवा पिंडौर, रैली कल्यानपुर, बभन का पुरवा, टिकरा, पड़री गनेशपुर, कांशी का पुरवा, बन का पुरवा, विनोहरा समेत 30 गांवों के करीब 20 हजार किसान सिंचाई करते हैं। किसान घनश्याम, देवनाथ दीक्षित, कालीशंकर अवस्थी, गोपी शुक्ला ने बताया कि माइनर में झाड़ियां उगी हैं।
तीन साल से सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता की जाती है। खेत के बगल से माइनर निकली है, लेकिन इसका पानी खेतों में लाने के लिए पंपिंग सेट का प्रयाग करना पड़ता है। पंपिंग सेट 150 रुपये में किराए पर लाना पड़ता है।
किसानों ने बताया कि इतना कम पानी आता है कि कुलाबों तक पानी ही नहीं पहुंच पाता है। यदि माइनर की सफाई कराने के बाद भरपूर पानी छोड़ा जाए तो किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।
इस साल माइनर की सफाई को कार्ययोजना में नहीं लिया गया। नहर में भरपूर पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
- विकास चंद्रा, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग