सम्मेलन में बोलते निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष वीबी सिंह।
लखनऊ। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश के विद्युत क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 33 हजार मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग है। यह वर्ष 2047 तक 1.56 लाख मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विद्युत क्षेत्र में बड़े विस्तार की आवश्यकता होगी। मुख्य अतिथि निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष वीबी सिंह ने ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और आधुनिक अवसंरचना को महत्वपूर्ण बताया। मुख्य वक्ता आशुतोष दीक्षित ने पारेषण और वितरण तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने इसके समयबद्ध विस्तार को अत्यंत आवश्यक बताया। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन आयोग के निदेशक अवधेश कुमार गुप्ता ने नई परियोजनाओं से पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ने की बात कही। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन कम करने, फ्लू गैस विगंधीकरण और कार्बन ग्रहण तकनीक अपनाने पर बल दिया।