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चरैवेति-चरैवेति के उर्दू अनुवाद ने शारिब तक पहुंचाया : राम नाईक

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लखनऊ। पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मेरे संस्मरणों की पुस्तक चरैवेति-चरैवेति के उर्दू अनुवाद ने मुझे शारिब रुदौलवी तक पहुंचाया था। पुस्तक का उर्दू अनुवाद करने के बाद से ही स्व. रुदौलवी मुझे और भी ज्यादा चाहने लगे थे। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह शायद यह थी कि वे जान चुके थे कि हम दोनों एक ही मजहब इंसानियत पर विश्वास करते थे। सोमवार को वे याद-ए-शारिब में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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अवधनामा एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से निशातगंज पेपरमिल कॉलोनी स्थित कैफी सभागार में शायर स्व. शारिब रुदौलवी की याद में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने अपने संस्मरणों से स्व. शारिब रुदौलवी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शारिब रुदौलवी बेहतरीन शायर थे और उन्होंने अपनी बेटी की याद को अमर करने के लिए लड़कियों का स्कूल खोलकर सैकड़ों बेटियों का जीवन संवारा। बताया, शारिब रुदौलवी ने अपने लेख में दिलवाले राजनेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद मेरा नाम लिया तो मुझे लगा कि लखनऊ आकर मैंने बहुत कुछ पाया है।
अध्यक्षता कर रहे पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने कहा कि स्व. शारिब को ईमानदार रहना पसंद था। चाहे मंच पर कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न बैठा हो, वहां पर भी उन्हें सच बोलना आता था। एरा विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डाॅ. अब्बास अली मेहंदी ने कहा कि शारिब रुदौलवी जितने बड़े इंसान थे उतने ही सरल स्वभाव के थे। इरफान लखनवी ने शारिब रुदौलवी पर नज्म पढ़ी। संचालन लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. अब्बास रजा नय्यर जलालपुरी ने किया। शोआ गर्ल्स कॉलेज की इंटर में टॉप करने वाली छात्राओं को पांच-पांच हजार रुपये की प्रो. शारिब रुदौलवी छात्रवृत्ति दिए जाने की घोषणा की।
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