मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश के प्रत्येक ग्रामीण गरीब परिवार की एक महिला को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) में जोड़कर प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। आजीविका मिशन के तहत 3000 से अधिक समूहों की महिलाएं उद्यमी बनेंगी और उनके पास स्थायी रोजगार उपलब्ध होगा। प्रत्येक महिला को वर्ष में 240 दिन से अधिक का रोजगार और हर महीने 5 से 7 हजार रुपये की आय होगी।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (यूएनडब्ल्यूएफ.पी) के बीच मंगलवार को डिजिटल एमओयू साइन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एसएचजी की महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों को वितरित किए गए पूरक पोषाहार पर प्राप्त लाभ में से भी अंश प्राप्त होगा। परियोजना का एक वर्ष का टर्न ओवर 1200 करोड़ रुपये होगा। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लखनऊ, बांदा, गोरखपुर, उन्नाव तथा फतेहपुर के टेक होम राशन माइक्रो इंटरप्राइज की अध्यक्षों से बात भी की।
ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक उन्नति होगी। कार्यक्रम को यूएनडब्ल्यूएफ.पी के निदेशक बिशो पराजुली ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर ग्राम्य विकास राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार एस. राधा चौहान, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, सूचना निदेशक शिशिर मौजूद थे।
लखनऊ समेत 18 जिलों में एसएचजी कर रहे पुष्टाहार उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन की ओर से पहले चरण में लखनऊ, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, उन्नाव, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बांदा, चंदौली, इटावा, बिजनौर, फतेहपुर, गोरखपुर, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, मैनपुरी, मिर्जापुर तथा प्रयागराज के 204 ब्लॉक में एसएचजी के जरिए पुष्टाहार उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। आने वाले समय में इसे सभी ब्लॉक में लागू किया जाएगा। इसके सुचारु क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग के लिए मिशन ने यूएनडब्ल्यूएफ पी के साथ एमओयू किया है।