सरकार द्वारा एस्मा लगाने के बाद बुधवार को कर्मचारी नेता दबाव में आ गए।
मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्तर पर ही वार्ता करने का दंभ भरने वाले कर्मचारी नेता बुधवार को एक बार फिर प्रमुख सचिव कार्मिक के बुलावे पर वार्ता करने पहुंच गए।
करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल से आवश्यक सेवाओं को अलग करने का फैसला ले लिया।
यानी अब हड़ताल में आवश्यक सेवाएं बाधित नहीं की जाएंगी। अभी तक जो भी इमरजेंसी सेवाएं बाधित हैं उन्हें भी गुरुवार से बहाल कर दिया जाएगा।
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राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले चल रही हड़ताल के नवें दिन दूसरे चरण की वार्ता हुई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सरकार से हड़ताली कर्मचारियों से वार्ता कर अपना पक्ष शुक्रवार तक रखने के लिए कहा था।
इसी के बाद मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने एक बार फिर बातचीत का जिम्मा प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार को सौंप दिया।
बुधवार शाम एनेक्सी में हुई वार्ता में कर्मचारी नेताओं ने कई बिंदुओं को रखा।
शाम छह बजे से आठ बजे तक चली वार्ता के बाद भी सरकार व कर्मचारी नेताओं के बीच मांगों को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों से आवश्यक सेवाएं बाधित न करने के लिए कहा। इस पर राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के नेता राजी हो गए।
नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की जो भी आवश्यक सेवाएं हैं उसे बाधित नहीं किया जाएगा।
आवश्यक सेवा वाले संगठन जैसे ऑप्टोमैट्रिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नर्सेज संघ आदि को हड़ताल से बाहर कर दिया जाएगा।
अधिकार मंच के नेताओं ने कहा कि गुरुवार से पूरी तरह स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने जा रही थीं। इसे ही हमने वापस लिया है।
अब यह कर्मचारी काला फीता बांधकर अपना काम करेंगे। बाकी सभी विभागों में हड़ताल पहले की तरह जारी रहेगी।
सरकार से जिन मांगों पर वार्ता हुई उसमें कोई भी निष्कर्ष नहीं निकल सका। हालांकि वार्ता का दौर अभी बंद नहीं हुआ है। वार्ता आगे भी जारी रहेगी।
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