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Lucknow News: कुकरैल को निर्मल बनाने के प्रयास शुरू

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लखनऊ। कुकरैल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। इसके उद्गम स्थल बीकेटी के अस्ती गांव में खोदाई का काम चालू कर दिया गया है। नदी में पानी रहे और उसकी अविरलता न बाधित हो, इसके लिए आस-पास के तालाबों को भी कुकरैल से जोड़ा जा रहा है। कुल 28 किमी के प्रोजेक्ट में ग्रामीण क्षेत्र के 4.2 किमी हिस्से में मनरेगा के तहत काम शुरू हो गया है। वहीं, पूरी नदी की सफाई के लिए सिंचाई विभाग ने विस्तृत डीपीआर शासन को भेजी है।

कुकरैल अपने उद्गम स्थल बीकेटी ब्लॉक के अस्ती गांव में ही अंतिम सांसें ले रही है। यहां से गोमती बैराज तक 28 किमी लंबी नदी में पानी रहे, इसके लिए इसे पुराने स्वरूप में लाने के प्रयास हो रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में आस-पास के 22 तालाबों को नदी से जोड़ा जाना है। मनरेगा के तहत अब तक आठ को नदी से जोड़ा जा चुका है, बाकी पर काम चल रहा है। इसके लिए 30 लाख रुपये का बजट है।

28 किमी लंबी नदी का 4.2 किमी हिस्सा ग्रामीण, 19.23 किमी वन क्षेत्र और सात किमी का हिस्सा नगरीय क्षेत्र में आता है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए सीडीओ, वन क्षेत्र के लिए डीएफओ और नगरीय क्षेत्र के लिए नगर आयुक्त को जिम्मेदारी दी गई है। मंडलायुक्त नोडल हैं।

डीपीआर को मंजूरी का इंतजार

जीर्णोद्धार योजना में प्रमुख रूप से नदी की सफाई होनी है। सिंचाई विभाग ने ग्राम्य विकास, वन विभाग व नगर आवास विभाग के साथ बैठक कर विस्तृत डीपीआर बनाई है, जिसे नगर आवास विभाग को भेजा गया है। इससे पहले बांध के अंदर डूब क्षेत्र में आने से अकबरनगर के अवैध निर्माण को ढहाकर वहां वनक्षेत्र विकसित किया गया है। सिंचाई विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश कुमार का कहना है कि डीपीआर को शासन से मंजूरी मिलते ही आगे का काम शुरू किया जाएगा।
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अभी यह है स्थिति

कुकरैल के उद्गम स्थल पर एक कुआं व दो बड़े तालाब हैं। इसके आगे नदी सूखी है। यहां से किसान पथ तक मनरेगा के तहत 1.5 किमी की ड्रेन की खोदाई की गई है। आगे का काम बाकी है। नदी के वन विभाग के क्षेत्र से नगरीय हिस्से के दायरे तक के 24 किमी में गंदा पानी गिरता है, जो गोमती बैराज में जाता है।
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