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Lucknow News: ईकोग्रीन ब्लैकलिस्ट, अब नहीं कर पाएगी काम

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लखनऊ। कचरा प्रबंधन में लापरवाही करने वाली चीनी कंपनी ईकोग्रीन को नगर निगम ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह नगर निगम में काम नहीं कर पाएगी। यह कार्रवाई सोमवार को एनजीटी में शहर के कचरा प्रबंधन को लेकर होने वाली सुनवाई से ठीक पहले की गई। इसके साथ डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व सफाई के लिए छह जोनों के लिए आई टेंडरों की तकनीकी बिड खोलने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सोमवार को तकनीकी बिड में सफल होने वाली कपंनियों की फाइनेंशियल बिड खुलेगी।
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ईकोग्रीन के कचरा प्रबंधन में फेल होने के बाद नगर निगम ने अनुबंध की शर्त के तहत नोटिस प्रक्रिया पूरी कर छह सितंबर को उसे काम से हटा दिया था। तीन महीने बाद इसे ब्लैकलिस्ट भी कर दिया है।

शहर की बदहाल कचरा व्यवस्था को लेकर नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह को एनजीटी में 28 अगस्त को पेश होना पड़ा था। इसमें उन्होंने सफाई में सुधार को लेकर उठाए जाने वाले कदमों में यह भी बताया कि था कि चीनी कंपनी का अनुबंध खत्म कर दिया है और उसे ब्लैकलिस्ट भी करेंगे। नगर निगम ने इसकी प्रक्रिया पूरी कर दी है, जिसकी जानकारी आज एनजीटी में दी जाएगी।
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दो जोनों की तकनीकी बिड बाकी

नगर निगम ने आठों जोन के लिए तीन पैकेज में टेंडर निकाले थे। पहले में जोन एक, चार, सात और दूसरे में जोन पांच, दो, आठ व तीसरे में जोन छह व तीन को शामिल किया था। सूत्रों ने बताया कि पैकेज एक व दो में आए टेंडरों की तकनीकी बिड खुलने के बाद उनकी तुलनात्मक रिपोर्ट समिति को मंजूरी के लिए भेज दी गई है। इसके बाद पैकेज तीन की तकनीकी बिड की रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसे मंजूरी के बाद फाइनेंशियल बिड खेाली जाएगी। तीन दिन बाद साफ हो जाएगा कि कौन सी कंपनी किस जोन में काम करेगी।





इन कपंनियों ने डाले हैं टेंडर

ग्लोबल (मुंबई), श्री श्याम (हरियाणा), बीवीजी (पुणे), चेन्नई (हैदराबाद), नेचर ग्रीन (नोएडा), लॉयन (लखनऊ), आर्यन (लखनऊ)



सिफारिश पर दागियों को काम देने की तैयारी

लखनऊ में सफाई का काम करने के लिए पहली बार मुंबई, पुणे, हैदराबाद, हरियाणा और नोएडा की कंपनियां आगे आई हैं। हालांकि, इनके साथ जोड़तोड़ से दो दागी कंपनियां आर्यन और लॉयन सिक्योरिटी गार्ड भी टेंडर डालने में सफल रही हैं। इनमें आर्यन ने एक दूसरी कंपनी से ज्वॉइंट वेंचर किया है। सूत्रों के मुताबिक लॉयन और आर्यन का मालिक असल में एक, लेकिन कागज पर दो हैं। इन दोनों कंपनियों पर कर्मचारी लगाने में फर्जीवाड़ा करने पर कई बार जुर्माना लगा है। इन्हें ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस भी कई बार जारी किया जा चुका है। चूंकि इन पर शासन के अफसरों से लेकर नेताओं तक का हाथ है, इसलिए ये कंपनियां ब्लैकलिस्ट होने से बच जाती हैं। अब एक बार फिर इन्हें काम देने की तैयारी है। इससे सफाई व्यवस्था में सुधार के प्रयासों को फिर झटका लगेगा।





कोट

अच्छी कंपनी को देंगे काम

दो पैकेज की तकनीकी बिड की तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार हो गई है। मंजूरी के लिए इन्हें निविदा समिति को भेजा गया है। दागी कंपनियों पर अंतिम निर्णय निविदा समिति देगी। नगर निगम का प्रयास है कि सफाई व्यवस्था का काम अच्छी कंपनी को दिया जाए, ताकि स्वच्छता रैंकिंग सुधरे।
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संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता नगर निगम
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