ई वोटिंग की बात करना अब जरूरी हो गया है क्योंकि चुनाव आयोग से लेकर राजनीतिक दलों तक के मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी मत प्रतिशत 65 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ पा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तो ये जैसे-तैसे 60 फीसदी भी नहीं पहुंच पाता। एक दौर वो भी था, जब 30-35 फीसदी मतदान में ही सरकारें बन जाती थीं। 20-25 फीसदी वोट पाने वाला दल सत्ता पर काबिज हो जाता था। साफ है कि कम वोटिंग नतीजों का सही विश्लेषण नहीं हो सकती।
कम मतदान की वजहें जिनका व्यावहारिक हल निकालना होगा
ऑनलाइन वोटिंग के इस प्रारूप पर भारत में हो रहा अध्ययन
मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन : तीन चरणों में इस तरह पहचान को कर सकते हैं पुख्ता
चुनौतियां तो हैं... पर सबका समाधान संभव है
चुनौती-1 : भारत में आज भी हर जगह इंटरनेट नहीं और बड़ी संख्या में लोग तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं।
समाधान : जब भी हम किसी नई तकनीक को अपनाते हैं तो ‘बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी’ के सिद्धांत को अपनाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो नई तकनीक को विकल्प के तौर पर आजमाते हैं। ऑनलाईन वोटिंग एक विकल्प के रूप में दिया जाए। खासकर उन लोगों के लिए जो घर से दूर हैं। बुजुर्ग, बीमार या फिर दिव्यांग हैं।
चुनौती-2 : मतदाता किसी लालच में लाॅग-इन करने के बाद किसी दूसरे से वोट डलवा सकता है। ऐसे में निष्पक्ष मतदान प्रभावित हो सकता है।
समाधान : इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और जेस्चर रिकग्निशन टेक्नोलाॅजी बेहद कारगर होगी। वोटिंग के दौरान यूजर को अपना वेबकैम ऑन करना होगा। एआई उसके चेहरे को स्वत: सरकारी डाटाबेस से मैैच करेगा। जेस्चर रिकग्निशन तकनीक की वजह से किसी और की उपस्थिति में मतदान संभव ही नहीं होगा।
चुनौती-3 : किस पार्टी को वोट दिया, ये साक्ष्य दिखाकर मतदाता पैसा वसूल सकता है।
समाधान : ऑनलाईन वोटिंग में वोट डालते ही डिसएबल यानी अदृश्य हो जाएगा। उसका न तो प्रिंट स्क्रीन लिया जा सकेगा और न ही स्क्रीनशाॅट। चूंकि अदृश्य है, तो मोबाइल से फोटो लेने पर भी स्क्रीन खाली दिखेगी।
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ऑनलाइन वोटिंग असंभव नहीं है
ऑनलाइन वोटिंग असंभव नहीं है। इसे सही तकनीक और योजना के जरिये लागू किया जा सकता है। साइबर हमलों से बचाने के लिए सिस्टम विकसित करना होगा। ये संभव है क्योंकि आरबीआई, इनकम टैक्स, जीएसटी, बैंक जैसे अति संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं। जब हमारी सारी सूचनाएं पूरी तरह सुरक्षित रह सकती हैं, तो ऑनलाईन वोटिंग भी सुरक्षा मामलों में अभेद्य हो सकती है।