लखनऊ। ई-रिक्शा चालक जीतू सिंह (40) की जान बिल्डर गोपाल अग्रवाल की एसयूवी ने ली थी। सोमवार को सामने आए सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि जानबूझकर एसयूवी दौड़ाई गई। जीतू चीखता रहा था, लेकिन गाड़ी नहीं रोकी थी। आखिर में गाड़ी से गिरकर उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद एफआईआर में गंभीर धारा नहीं लगाई गई। बिल्डर अभी तक गिरफ्त से दूर है। बीते रविवार को स्वास्थ्य भवन चौराहे से परिवर्तन चौक मार्ग के बीच जीतू सिंह की मौत हो गई थी। सोमवार को घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ, जिससे पता चला कि टक्कर लगने के बाद जीतू जब एसयूवी की खिड़की पकड़कर खड़ा था, तभी चालक ने गाड़ी तेज रफ्तार में दौड़ा दी थी। करीब डेढ़ सौ मीटर तक उसे घसीटता रहा था। जब गाड़ी मोड़ी थी तो वह सड़क पर गिरा था और उसकी मौत हो गई थी। सोमवार रात को पुलिस ने एसयूवी के नंबर के आधार पर अज्ञात चालक पर केस दर्ज किया था, जिसमें लापरवाही से गाड़ी चलाना जिससे किसी की जान चली जाए, इस धारा (304ए) में मुकदमा दर्ज किया था। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि चालक को पता था कि जो वह कर रहा है, उससे जीतू की जान जा सकती है। फिर भी उसने गाड़ी नहीं रोकी। कानून के जानकारों के मुताबिक केस में गैर इरादतन हत्या की धारा (304) एफआईआर में होनी चाहिए। हल्की धारा से आरोपी को फायदा मिलेगा।
पैरवी कराई, फिर मोबाइल बंद कर गायब हो गया
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आया कि एसयूवी बिल्डर गोपाल अग्रवाल की है। घटना के वक्त कार में उनका बेटा व ड्राइवर था। गोपाल थे या नहीं पुलिस इसकी तफ्तीश कर रही है। डीसीपी का कहना है कि जो भी शख्स वाहन चला रहा होगा, उस पर कार्रवाई होगी। उधर घटना के बाद गोपाल बचने के लिए लगातार पैरवी करवाता रहा। जब फुटेज वायरल हुआ तो मोबाइल बंद कर गायब हो गया।
बदली जाएगी धारा
डीसीपी सेंट्रल अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया गया था। सीसीटीवी फुटेज बाद में सामने आया। विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर धारा बदली जाएगी। गाड़ी जब्त कर ली गई है। गाड़ी मालिक की तलाश की जा रही है।