लखनऊ। एरीज एग्रो कंपनी के मैनेजर देशराम के शव को ठिकाने लगाने के बाद ड्राइवर व कई कर्मचारी नौकरी छोड़कर भाग गए। इसमें मुख्य रूप से हाइड्रा मशीन व डाला चालक के अलावा शव को ठिकाने लगाने में कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी का ब्योरा पीएनसी कंपनी से मांगा है। इनकी तलाश की जा रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। वहीं, कंपनी ने देशराम की मौत को पूरी तरह से दबा दिया था। पीड़ित परिवार ने सभी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
देशराम की मौत के बाद कर्मचारियों ने कंपनी के अफसरों को जानकारी दी। उन्होंने ही शव को ठिकाने लगाने को कहा। जिसके बाद शव को कंबल में लपेटकर डाले में डाला गया। फिर शव फेंका गया। ये सब हाईवे किनारे हुआ। चूंकि लंबे समय से दिन रात काम चल रहा है। इसलिए कहां पर क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस को नहीं हो सकी। देशराम की बेटी ने बताया कि 3 अप्रैल की रात साढ़े आठ बजे उनकी पिता से फोन पर बात हुई थी। बाद में पता चला था कि रात 11:15 बजे देशराम ने अपने परिचित सोनू से फोन पर बात की। फिर जब सुबह करीब पांच बजे उन्होंने कॉल की तो नंबर बंद मिला। मतलब घटना रात सवा ग्यारह बजे के बाद की है।
शरीर पर भी मिली चोटें, शॉक एंड हेमरेज से हुई मौत
सोहरामऊ थानेदार ने बताया कि देशराम का दाहिना पैर कट गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि शॉक एंड हेमरेज से उनकी मौत हुई। शरीर पर कई गंभीर चोटें भी थीं।
... तो शायद बच जाती जान
देशराम के परिवार में उनकी पत्नी सरस्वती व पांच बच्चे हैं। उनकी मौत से परिजन स्तब्ध हैं। उनकी ही कमाई से परिवार का खर्च चलता था। जिसके पास देशराम रह रहे थे उस रवि पांडेय ने पुलिस को बताया कि हादसा होने के बाद काफी देर तक देशराम तड़पते रहे थे। कुछ देर बाद सांसें बंद हो गई थीं। परिजनों का कहना है कि अगर तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद जान बच जाती।
दो पहलुओं पर जांच...
पुलिस ने तहरीर के आधार पर हत्या की धारा में केस दर्ज किया है। जब देशराम सड़क पर टहल रहा था, तभी मशीन की चपेट में आकर दब गया। ये इरादतन हुआ है या नहीं, इन दोनों पहलुओं को पुलिस और गहनता से छानबीन कर रही है, जिसके साक्ष्य मिलेंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।