प्रवेंद्र गुप्ता, लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर छह दिन से कम है। इससे शहर के 20 लाख लोगों की जलापूर्ति पर संकट आ गया है। नदी का जलस्तर औसत पर लाने के लिए सिंचाई विभाग छह दिन से पानी छोड़ने की बात कह रहा है, लेकिन अभी तक छोड़ा नहीं है। अब कह रहा है कि तीन-चार दिन और लगेंगे, क्योंकि नहरों में ही पानी की कमी है। लखनऊ को पीने का पानी देने के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ेगी, क्योंकि रोस्टर के हिसाब से दो मार्च को शहर के लिए पानी छोड़ा जाना है। जलकल विभाग को डर है कि यही हाल कुछ दिन और रहा तो शहर में पानी के लिए हाहाकार मच सकता है। ऐसे में अब मंडलायुक्त से मदद मांगी जाएगी कि वह सिंचाई विभाग को निर्देश दें कि वह गोमती के लिए अतिरिक्त पानी छोड़े।
गर्मी शुरू होते ही शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है। इसे दूर करने के लिए जलकल विभाग ने सिंचाई विभाग को पत्र भेजकर गोमती में शारदा का अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग की है। शहर की करीब 50 प्रतिशत आबादी को गोमती से ही पानी उपलब्ध कराया जाता है। ऐशबाग और बालागंज जलकल गोमती के पानी पर ही निर्भर हैं। गर्मियों में नदी का जल स्तर गिर जाता है और प्रवाह कम हो जाता है। दूसरी तरफ पानी की मांग बढ़ जाती है। वहीं, प्रवाह कम होने से नदी का प्रदूषण भी बढ़ जाता है, जिसे कम करने के लिए बैराज का गेट खोलकर रोजाना सिंचाई विभाग को फ्लशिंग करनी पड़ती है। इससे नदी का जलस्तर नीचे चला जाता है और गऊघाट पर पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। इसे देखते हुए जलकल विभाग ने सिंचाई विभाग से रोजाना 100 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग की है।
गऊघाट से मिलता है आधे शहर को पानी
शहर की 20 लाख की आबादी को ऐशबाग और बालागंज जलकल से जलापूर्ति की जाती है। इन दोनों जलकलों को गऊघाट से पानी दिया जाता है। जब यहां पानी का लेवल 346.8 फीट से नीचे चला जाता है तो दोनों जलकलों को पर्याप्त कच्चा पानी नहीं मिल पाता है। पिछले छह दिनों से गऊघाट पर पानी का स्तर न्यूनतम से एक से दो फीट तक नीचे चल रहा है। शनिवार को गऊघाट पर पानी का लेवल 345.8 फीट रहा। रविवार को भी यही हाल रहा। इससे अभी बालागंज जलकल पर तो नहीं, लेकिन ऐशबाग जलकल पर असर पड़ रहा है। चार दिन पहले इसके कारण ही पानी की आपूर्ति का समय एक घंटे लेट किया गया था। जलकल को उम्मीद थी कि सिंचाई विभाग पानी छोड़ देगा, लेकिन छोड़ा नहीं। इससे गऊघाट पर एक पंप बंद करना पड़ा था। अब संकट से बचने के लिए जलकल विभाग कई दिनों से गऊघाट पर ड्रेजिंग करा रहा है। इससे जलस्तर एक फीट तो बढ़ा, लेकिन न्यूनतम स्तर पर अब तक नहीं आया है।
नहरों में भी पानी कम
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता मंगलम का कहना है कि नहरों में सिंचाई के लिए ही पानी कम है। उसके लिए ही पानी का इंतजाम इधर-उधर से किया जाता है। दूसरी ओर गोमती के लिए रोस्टर अभी नहीं है। दो मार्च से रोस्टर है। गोमती में पानी संकट को देखते हुए इंतजाम किया जा रहा है। इसमें तीन से चार दिन लग जाएंगे, क्योंकि लखीमपुर से आगे बनवसा से पानी छोड़ा जाता है। वहां से आने में तीन से चार दिन का समय लगता है।
ऐशबाग के लिए कोई विकल्प नहीं
जलकल महाप्रबंधक रामकैलाश का कहना है कि अभी तो गऊघाट पर ड्रेजिंग कर वाटर लेवल एक फीट बढ़ा लिया गया है। इससे पानी मिल जा रहा है। यदि एक सप्ताह के अंदर पानी नहीं आया तो हालात बिगड़ जाएंगे। ऐशबाग जलकल के लिए पानी का कोई और विकल्प नहीं है। अभी तो बालागंज जलकल पर असर नहीं है, लेकिन एक सप्ताह बाद वहां पर संकट हो जाएगा। ऐसे में सिंचाई विभाग जल्द पानी छोड़ेगा तभी राहत मिलेगी। सोमवार को मंडलायुक्त से मिलेंगे कि वह सिंचाई विभाग को पानी छोड़ने के लिए निर्देशित करें।