ठाकुरगंज इलाके में डॉ. मीसम रिजवी की सोमवार सुबह संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मेंहदी घाट के पास सड़क किनारे खड़ी कार की ड्राइविंग सीट पर उनका शव मिला।
वे बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहे थे। उनके बाएं हाथ पर वीगो लगा था। कार में दो खाली सिरिंज व बेहोशी के इंजेक्शन की आधी खाली शीशी मिली। पुलिस ने डॉक्टर के अवसाद में खुदकुशी करने की आशंका जताई है।
इंस्पेक्टर दीपक दुबे ने बताया कि मेंहदी घाट के पास सड़क किनारे खड़ी कार में एक व्यक्ति को बेसुध पड़ा देखकर राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। उसकी पहचान सरफराजगंज के डॉ. मीसम रिजवी (40) के रूप में हुई।
आनन-फानन उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिवारीजनों को बुलाकर तहकीकात शुरू की गई। डॉ. मीसम के बाएं हाथ पर वीगो लगा था।
पता चला कि हंसमुख स्वभाव के डॉ. मीसम करीब दो महीने से अवसादग्रस्त थे। हालांकि उन्होंने पिता मो. असलम, पत्नी डॉ. जरीन फातिमा या किसी अन्य करीबी को परेशानी नहीं बताई थी। पुलिस ने खुदकुशी की आशंका जताते हुए शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहे थे
परिवारीजनों ने बताया कि डॉ. मीसम रोजाना की तरह सोमवार सुबह बेटी वरा फातिमा को हजरतगंज स्थित ला-मार्टीनियर स्कूल छोड़ने गए थे। वह कक्षा चार की छात्रा है। बेटी को स्कूल छोड़कर लौटने के दौरान उनकी संदिग्ध हालात में मौत हुई।
गोल्ड मेडलिस्ट बेटे की मौत से टूटा पहाड़
बेटे की मौत पर बिलखते इंडियन ऑयल के सेवानिवृत्त डिप्टी मैनेजर मो. असलम ने बताया कि मीसम ने वर्ष 2004-07 में केरल के अमृता इंस्टीट्यूट से एनेस्थेसिया की डिग्री ली। उसे गोल्ड मेडल मिला था। इसके बाद न्यूरो एनेस्थेसिया से मास्टर डिग्री लेकर लौटा और एसजीपीजीआई में दो साल एसआर रहा। मीसम की पत्नी डॉ. जरीन इंदिरा गांधी नेत्र चिकित्सालय में हैं। मीसम की बेटी वरा फातिमा (8) और बेटा दानियाल (4) है। मो. असलम ने बताया कि उनका छोटा बेटा अब्बास दिव्यांग है।