उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज
लखनऊ। न हर बात पर अड़ना सही है और न ही हर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करना। जीवन में जरूरत है तो विवेक, संयम और संतुलन की। अधिक जिद्दीपन और भोलापन व्यक्ति से गलत निर्णय करा सकता है। इसलिए इन दोनों की अति से बचना चाहिए। ये बातें बृहस्पतिवार को उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज ने कहीं। आशियाना स्थित दिव्यांग जैन मंदिर में चल रहे पावन वर्षायोग के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में विवेक, संयम और संतुलन आवश्यक है। अधिक जिद्दीपन और भोलापन नरक के द्वार खोलते हैं। वहीं, मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि 11 अक्तूबर को वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली सरस्वती महा अर्चना होगी। मंदिर में लगभग 1200 वर्ष प्राचीन श्री सरस्वती माता की प्रतिमा के दुर्लभ दर्शन होंगे। दो अगस्त को जैन समाज के मेधावियों का प्रतिभा सम्मान समारोह होगा। 10वीं, 12वीं और विभिन्न डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।