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Lucknow News: शहर के दिव्यांग एथलीट श्रेयांश का डबल धमाका

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लखनऊ। शहर के स्टार दिव्यांग एथलीट श्रेयांश त्रिवेदी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकदार प्रदर्शन जारी है। उन्होंने पुर्तगाल में आयोजित इंटरनेशनल व्हीलचेयर एंड एम्पूटी स्पोर्ट्स (आईडब्ल्यूएएस) वर्ल्ड गेम्स की 100 मीटर में स्वर्ण और 200 मीटर में रजत जीतकर इतिहास रच दिया। इससे पहले श्रेयांश जुलाई में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की फर्राटा में कांस्य पदक जीत चुके हैं।
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पुर्तगाल में गेम्स की 100 मीटर दौड़ में 17 वर्षीय श्रेयांश ने 12.61 सेकंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि इक्वाडोर के क्लाडर ने 13.25 सेकंड के साथ रजत और भारत के नवीन मलिक 13.96 सेकंड का समय निकालकर कांस्य जीता। इसी तरह 200 मीटर दौड़ में अल्जीरिया के सोफियाने ने स्वर्ण, भारत के श्रेयांश ने रजत और इक्वाडोर के क्लाडर ने कांस्य पदक जीता। दिल्ली में अपने कोच और पूर्व अंतरराष्ट्रीय फर्राटा धावक अमित खन्ना से ट्रेनिंग लेने के बाद श्रेयांश के प्रदर्शन में खासा सुधार आया है। उनके चमकदार कॅरिअर की शुरुआत वर्ष 2018 में नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 100 मीटर मेें स्वर्ण के साथ हुई थी। दो साल के बाद तीसरी इंडिया ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में श्रेयांश ने 100 और 200 मीटर में स्वर्ण जीतकर अपना गोल्डन डबल पूरा किया। वर्ष 2022 में उन्होंने लगातार दो राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स मीट में 100 और 200 मीटर में स्वर्ण जीतकर सुखद भविष्य के संकेत दे दिए थे।
...पर आज तक नहीं मिली प्रोत्साहन राशि
सितंबर 2020 में प्रदेश सरकार ने सामान्य खिलाड़ियों के बराबर दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने की घोषणा की थी। इस संबंध में तत्काल शासनादेश भी जारी हुआ, लेकिन श्रेयांश को आज भी प्रोत्साहन राशि का इंतजार है। बृहस्पतिवार को भारत लौटने पर अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि अभी तक मुझे एक बार भी प्रदेश सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। अपने प्रदर्शन से संबंधित सभी कागजात खेल निदेशालय में जमा करवा दिए है। उम्मीद है कि प्रदेश सरकार मेरी उपलब्धियों को प्रमाणित करके प्रोत्साहन धनराशि देगी। उधर, प्रदेश के खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि अभी तक शासन की ओर से किसी भी पैरालंपिक कमेटी को मान्यता नहीं मिली है। जैसे ही कमेटी को अमलीजामा पहनाया जाएगा, वैसे ही दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहन धनराशि देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। कोशिश रहेगी कि सितंबर 2020 के बाद सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को पुरस्कृत किया जाए।
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