लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और मालवीय मिशन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘इक्कीसवीं सदी की हिंदी गजल’ विषय पर चर्चा हुई। इस माैके पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी अपने संबोधन में इक्कीसवीं सदी की पृष्ठभूमि में बीसवीं शताब्दी की हिंदी गजल परंपरा में निराला, त्रिलोचन से लेकर दुष्यंत कुमार आदि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कविता का जो भी विषय हो सकता है, वह गजल का भी विषय बन सकता है।आज किसानों-श्रमिकों, पर्यावरण पर अधिक गजलें लिखी जा रही हैं।