रायबरेली। पूर्व मंत्री एवं सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज एक राजा होते हुए भी दलित शोषित व पिछड़े वर्ग के समाज को हमेशा आगे बढ़ाने का काम किया। अपने शासनकाल में उन्होंने दलितों को शिक्षा देने, बाल विवाह पर रोक लगाने एवं धर्म की लड़ाई के लिए हमेशा आगे रहे हैं। मुगल शासकों से उन्होंने डटकर सामना किया था। यह बातें उन्होंने सोमवार को दीनशाहगौरा के झरहा रामनगर में छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिल्ली के मंदिर में आदिवासी होने के कारण अपमानित होना पड़ा और मंदिर के पुजारियों ने गेट के अंदर नहीं जाने दिया। स्वामी प्रसाद को लेकर कोई कहता है कि जबान काट लेंगे, कोई कहता है सिर कलम कर देंगे। इससे मैं डरने वाला नहीं है। मैंने हमेशा से ही दलित व पिछड़ों की लड़ाई लड़ी है। शासन में सत्ता का मोह त्याग कर उन्होंने पिछड़ों का हमेशा साथ दिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकार विकास करने में फेल हैं। हम सबको आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार को सबक सिखाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान झरहा विमला देवी एवं प्रधान प्रतिनिधि नीरज निर्मल ने किया। इस मौके पर राम सिंह यादव, रामसेवक वर्मा, ब्लॉक प्रमुख गौरा सविता मौर्य, दिलीप मौर्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य जसवंत यादव, धर्मेंद्र यादव, प्रधान संघ अध्यक्ष दीनशाह गौरा ऋषि प्रसाद, संतोष मौर्य, कमलेश मौर्य, मुकेश मौर्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह ब्राह्मण विरोधी नहीं हैं। जो स्वयं अपमानित किया जाता है, वह दूसरों को अपमानित कैसे कर सकता है। कहा कि हम इंसानियत का पुजारी हैं। सबका सम्मान करता हूं। हम लोग खुद अपमानित होते आ रहे हैं। इसलिए दूसरों को अपमानित करने की बात सोच नहीं सकता हूं।